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कप्तानी के लिए अभी धौनी का विकल्प नहीं

भारतीय क्रिकेट में सब ठीक चल रहा था, लेकिन कप्तान महेंद्र सिंह धौनी करीब दो साल पहले दिए गए अपने ही बयान में फंस गए। लगभग दो साल पहले उन्होंने कहा था कि 2015 विश्व कप से पहले वह क्रिकेट के एक फॉर्मेट को छोड़ सकते हैं। मगर अब वह कह रहे हैं कि फिलहाल वह टेस्ट, वनडे और टी-20, तीनों फॉर्मेट में कप्तानी करते रहेंगे। इसे धौनी का यू-टर्न भी कहा जा सकता है, लेकिन सच्चाई यह है कि धौनी इस वक्त भारतीय टीम की जरूरत को समझ रहे हैं। इस समय उनका कप्तान बने रहना टीम इंडिया की जरूरत है। 2014 का पूरा साल चुनौतियों से भरा है। इस साल भारतीय टीम को न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों के खिलाफ मैदान में उतरना है, और वह भी उन्हीं की जमीन पर। इसके अलावा टी-20 विश्व कप और एशिया कप जैसे टूर्नामेंट भी हैं। साल 2015 का विश्व कप तो खैर है ही। महेंद्र सिंह धौनी के कप्तानी छोड़ने की सूरत में मौजूदा टीम में केवल विराट कोहली ही हैं, जिन्हें कप्तानी का जिम्मा दिया जा सकता है। लेकिन इसमें बड़ा रिस्क है।

यह सच है कि विराट इस वक्त अपने करियर के शानदार दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन उससे भी बड़ा सच यह है कि कप्तानी के बोझ में इस दौर पर बुरा असर पड़ सकता है। कप्तानी विराट के लिए उम्मीदों व अपेक्षाओं के बोझ को और बढ़ाएगी। विराट कोहली ने जब भी कप्तानी की, उसमें कोई बड़ा कारनामा करके दिखाया नहीं है। इंडियन प्रीमियर लीग में विराट रॉयल चैलेंजर्स, बेंगलुरु की कप्तानी करते हैं, लेकिन उनकी टीम की हालत अच्छी नहीं रही है। पिछले सीजन में उनकी टीम पांचवें पायदान पर रही थी। इसे अगर उन्हें चुनने का पैमाना न भी माना जाए, तब भी अभी उनकी भूमिका कुछ और है।

पिछले दिनों में वनडे क्रिकेट में विराट के शानदार प्रदर्शन के बाद कई दिग्गजों ने कहा कि वह वनडे क्रिकेट में सचिन के रिकॉर्ड को तोड़ सकते हैं। दक्षिण अफ्रीका के हालिया दौरे पर उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में नंबर चार पर बल्लेबाजी भी की, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। विराट ने न सिर्फ उस जिम्मेदारी को निभाया, बल्कि शानदार शतक जड़कर यह भी बताया कि वह इस जिम्मेदारी को उठाने के लिए मानसिक तौर पर तैयार थे। ऐसे में, उनसे यह उम्मीद भी करना कि वह धौनी जैसी कप्तानी करें, उनके साथ ज्यादती होगी।

इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की टीमों में अलग-अलग कप्तान का फॉर्मूला अपनाया जा रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह फॉर्मूला उनकी टीमों को बहुत रास आ रहा हो। धौनी इस साल जुलाई में 33 साल के होंगे, अगले साल वर्ल्ड कप में छह-आठ महीने और जोड़ दिए जाएं, तो भी उम्र के लिहाज से धौनी के सामने कोई परेशानी नहीं। फिटनेस में भी धौनी फिलहाल अच्छे हैं। लिहाजा कप्तानी को लेकर फिलहाल फिक्र करने की जरूरत नहीं है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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