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भाचापा को भाया गुजरात मॉडल

भारतीयोनता पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह आगामी लोकसभा चुनाव गुारात मॉडल पर ही लड़ेगी। गुारात की सफलता से अभिभूत पार्टी के पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी ने नरंन्द्र मोदी की र्ता पर ही भारत की अस्मिता के सवाल को उत्तर प्रदेश में चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए उठाया। उन्होंने कहा कि भारत को परम वैभव की ओर लेोाना है। भाापा इस गौरव को पाने के लिए एक माध्यम भर है। याद रहे कि मोदी ने गुारात दंगों की तपिश को वहाँ के लोगों को गुारात की अस्मिता सेोोड़कर ठंडा कर दिया था। आडवाणी ने कानपुर के ऐतिहासिक फूल बाग मैदान में बार- बार इस बात को दोहराया कि भाापा की सबसे बड़ी चिंता यह है कि हम भारत माता को कैसे परम वैभव दिलाएँ। उन्होंने कहा कि हम भारत माता का ऐसा मंदिर बनाना चाहते हैंोहाँ गरीबी, भुखमरी, भ्रष्टाचार, अशिक्षा, बेरोगारी आदि बीमारियाँ न हों। भाापा ने इसका संकल्प किया है। देश में परमाणु करार पर मचे बवाल से पार्टी को अलग करते हुये आडवाणी की रणनीति रही कि उनके राष्ट्रवाद की लड़ाई परमाणु अखाड़े में न हो। उनकी बातों से लगा कि भाापा करार पर यूपीए सरकार से नहीं भिड़ना चाहती है।ड्ढr आडवाणी ने कहा कि कांग्रेस और वामपंथी परमाणु करार पर एक दूसर को सरकार गिराने की धमकी देते रहते हैं। आतंकवाद ौसे सवाल पर उनकी निगाहें नहीं हैं। आतंकवाद से लड़ने वाले पोटा ौसे कानून को खत्म कर यूपीए सरकार ने आतंकवादियों को संदेश दिया है कि वे खुलेआमोो चाहे देश में करं। यूपीए सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में देश में हुई आतंकी वारदातों में शामिल एक भी आतंकी को आा तक साा नहीं हुई। उन्होंने परमाणु करार पर यह भी साफ किया कि यदि वामपंथी सरकार से समर्थन वापस लेते हैं तो हम अल्पमत सरकार नहीं चलने देंगे। हम सरकार को संसद में विश्वासमत प्राप्त करने के लिये माबूर कर देंगे।ड्ढr आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण का मसला भी उठाया। मसले पर उदारवाद की चादर ओढ़े आडवाणी ने कहा कि राममंदिर आंदोलन ने देश की राानीतिक दिशा बदल दी थी। देश कीोनता अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर देखना चाहती है। उन्होंने अमरनाथ श्राइन बोर्ड के भूमि विवाद काोिक्र तक नहीं किया। यह तब थाोब कानपुर में विश्व हिन्दू परिषद की केन्द्रीय समिति इस मसले पर आंदोलन की रणनीति बना रही है। इसमें हा हाउस और मसिदों पर धरना प्रदर्शन करने ौसे आक्रामक कार्यक्रम भी हैं। लेकिन बीते एक साल से अपनी उदारवादी छवि बना रहे आडवाणी ने अमरनाथ श्राइन बोर्ड पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी।ड्ढr दिलचस्प बात रही कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में चुनाव अभियान शुरू करते हुये प्रदेश की मायावती सरकार पर भी कोई आरोप प्रत्यारोप नहीं लगाये। इससे यह पक्का हो गया कि अंदरखाने भाापा और बसपा एक दूसर से पींगें लड़ा रहे हैं। आडवाणी ने यूपीए सरकार को आईसीयू में बताया और कहा कि उसकी कब मौत होोायेगी किसी को नहीं पता। उन्होने वाापेयी सरकार की उपलब्धियों का भीोिक्र किया। कहा कि महंगाई हमार समय में भी बढ़ी। लेकिन हमनेोनता पर उसका असर नहीं पड़ने दिया। उन्होंने कहा कि आम आदमी के नाम से सत्ता तक पहुंची कांग्रेस आम आदमी के साथ नहीं है। असल में कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ विश्वासघात है।

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