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मछली पानी में करती क्या हो?

मछली पानी में करती क्या हो?

मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है.. ये कविता की पंक्तियां हैं और तुम भी इसे गाते होगे। लेकिन मछली की दुनिया के बारे में तुम कितना जानते हो, जैसे वो क्या खाती हैं, कैसे बोलती हैं, ठंड में क्या करती हैं आदि। आज इन्हीं के बारे में तुम्हें बता रही हैं मोनिका मीनल

हमेशा तैरती रहने वाली ये मछलियां सचमुच कितनी गजब की होती होंगी न। सोचो जब कभी तुम स्विमिंग के लिए जाते हो, कितनी हिदायतें मिलती हैं न बड़ों से। सावधानी से तैरना, पानी में कांटेदार पौधे होते हैं, जहरीले जंतु व पत्थरों से भी खुद को बचाना। पर क्या कभी सोचा है उस जल की रानी यानी मछली रानी के बारे में, जो अपनी जिंदगी उसी अथाह पानी में गोते लगाते और तैरते हुए काटती है। उसे तो कोई नहीं समझाता और न हिदायतें देता है।

कैसी-कैसी मछलियां
जॉलेस यानी जबड़ा विहीन मछलियां, जैसे हैग फिश और लैंप्रेस
कार्टिलेजिनस फिश, जैसे- शार्क, स्केट्स और रेज
बोनी फिशेज, जैसे- टूना, ईल और ट्राउट

प्रत्येक वर्ष 200 या 300 नयी मछलियों की खोज होती है और उनके नाम रखे जाते हैं। ये मछलियां विभिन्न आकार की होती हैं। सबसे छोटी मछली का नाम स्टाउट है। यह करीब 7 मि.मी. लंबाई वाली है। वहीं व्हेल, शार्क 12 मीटर की लंबाई तक बढ़ सकती हैं।

ऐसे बचाती हैं खुद को
इनके शरीर पर स्केल्स होते हैं, जो एक लेयर बनाते हैं और इनके लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं। ये लेयर मछलियों के लाइफस्टाइल के अनुसार बनते हैं। उदाहरण के लिए जो मछलियां तटीय स्थानों पर रहती हैं उनके शरीर पर यह सख्त होता है। जो गहरे पानी में रहती हैं, उनका इतना सख्त कवच नहीं होता। इन स्केल्स पर म्यूकस का कवर भी होता है, जो इनकी त्वचा को स्लिपरी बनाकर और सुरक्षित करता है। 

कितनी लंबी होती है जिंदगी
कुछ मछलियों का जीवन बस कुछ हफ्तों के लिए होता है, वहीं कुछ 50 साल तक जीती हैं।

कैसे सांस लेती हैं ये...
सभी को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। मछलियों के पास विशेष अंग यानी गिल्स इसीलिए होते हैं। ये उनके सिर के दोनों ओर पाए जाते हैं। मछलियां पानी के अंदर सांस लेने के लिए मुंह को खोलती हैं और गिल्स की तरफ पंप कर देती हैं। इसके बाद ये गिल्स में उपस्थित मेंमब्रेन की मदद से पानी में उपस्थित ऑक्सीजन को सोख लेती हैं। इसके बाद गिल्स खुलने से ये पानी बाहर आ जाता है।

कैसे जानोगे इनकी उम्र
इनके स्केल्स पर बने ग्रोथ रिंग्स को वैज्ञानिक देखते हैं और इनकी उम्र का पता लगाते हैं।

सर्दियों में क्या करती हैं मछलियां...
ठंड और पानी में.. ना बाबा ना

न ये तुम्हारी तरह गर्म कपड़ों से खुद को बचाती हैं और न पानी से निकलकर कहीं गर्म स्थान पर जा सकती हैं। दरअसल, मछलियां कोल्ड ब्लडेड जीव होती हैं अर्थात् इनका शरीर आसपास के तापमान के अनुसार अपने आपको ढाल लेता है।

सर्दियों में इनकी दुनिया धीमी गति से चलती है। जैसे ही तापमान कम होता है, वैसे ही इनकी एक्टिविटी भी धीमी हो जाती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अधिकांश मछलियों की जिंदगी निष्क्रिय सी हो जाती है। ये अपना घर उस स्थान पर बनाती हैं, जहां का पानी कम तापमान में बर्फ न बनता हो यानी पत्थरों के पीछे या गहरे तालाब में। अधिकतर मछलियां सर्दी के मौसम में पानी के अंदर गर्म स्थान खोजती हैं, जबकि ट्राउट और साल्मन मछलियां तो शीत ऋतु में भी सक्रिय होती हैं और रहने के लिए भी ठंडी जगह खोजती हैं। वैसे बसंत समय आते ही सभी मछलियों की जिंदगी फिर से स्वाभाविक रूप से चलने लगती है।

बोलो मछली कितना पानी
पहले लोग समझते थे कि ये मछलियां बोलना नहीं जानतीं। पर जब पानी के अंदर आवाज खोजने वाली मशीन खोजी गयी तब पता चला कि ये कितना गिटर-पिटर करती हैं। क्रोकर नाम की एक मछली होती है, जो बिल्कुल कछुए की भांति आवाज निकालती है। यानी सभी मछलियां आपस में बात करती हैं। कुछ तो बिल्कुल विस्फोट सी आवाज निकालती हैं। ये आवाज तब निकलती है, जब वे मछुआरे की जाल में फंस जाती हैं।

होता यह है कि इनके पास एक छोटा सा स्विम ब्लाडर होता है, जिसमें गैस भरी होती है ताकि वे आसानी से तैर सकें और आराम करने के समय वे इस ब्लाडर के आकार को अपने अनुरूप ढाल लेती हैं। लेकिन जब अचानक से मछुआरे के जाल में फंसती हैं, तब उनके पास इतना समय नहीं होता कि वे उस गैस को बाहर कर दें। जैसे ही वे पानी के बाहर आती हैं, उनका ब्लाडर फट जाता है और विस्फोट सी आवाज होती है।

विशालकाय मछलियां
समुद्र में रहने वाले प्राणियों में व्हेल एक विशाल मछली है। इसकी स्पर्म व्हेल, किलर व्हेल, पायलट व्हेल, बेलुगा व्हेल आदि प्रजातियां होती हैं। ब्लू व्हेल इनमें सर्वाधिक विशालकाय होती है। इसकी लंबाई 115 फुट और वजन 150 से 170 टन तक होता है, जबकि कुछ व्हेल 11 फुट की भी होती हैं। समुद्र में 5 करोड़ वर्ष पूर्व व्हेल अस्तित्व में आई। इसकी गर्दन बहुत लचीली होती है, जो तैरते वक्त गोल घूम सकती है। यह ब्लोहोल्स से सांस लेती है। बैलीन व्हेल के दो ब्लोहोल्स होते हैं, जबकि दांत वाली व्हेल के एक ब्लोहोल होता है। यह उनके सिर के ऊपरी हिस्से में होते हैं। जब ब्लोहोल्स से व्हेल सांस लेती है तो उसके साथ काफी मात्रा में पानी भी उसके फेफड़ों में जमा हो जाता है, जिसे बाद में फव्वारे के रूप में वापस बाहर कर देती है। व्हेल भी आराम करती है। बाकी सभी जानवर तो सो सकते हैं, लेकिन व्हेल कभी भी लंबे समय तक नहीं सोती। इसके शरीर का आकार इस तरह गोल होता है कि यदि यह सो जाए तो डूबकर मर जाती है। केवल इसका मस्तिष्क कुछ समय के लिए सोता है। व्हेल अपने दूसरे साथियों से संपर्क करते समय एक मधुर ध्वनि निकालती हैं, जिसे व्हेल सॉन्ग कहा जाता है।

सूंघकर पहचान लेती है सेलमन
कुछ समय पहले ग्लासगो यूनिवर्सिटी के विज्ञानियों ने यह दावा किया है कि सेलमन फिश के अंदर गजब की सूंघने की शक्ति होती है। वह सूंघकर यह जान सकती है कि सामने वाला उसके परिवार का हिस्सा है या कोई दूसरा। इसके लिए विज्ञानी, दो परिवारों की 44 सेलमन फिश लाए और उन्हें कई वॉटर टैंक्स में डाल दिया। दोनों ही टैंकों में दोनों परिवारों की मछलियां थीं। उस समय यह पाया कि मछलियां इतनी तेजी से एक-दूसरे को सूंघ रही थीं कि टैंक में अधिक से अधिक पानी का सर्कुलेशन हो रहा था।

चौंक गए ना?
कुछ फ्लैटफिश समुद्री तल पर खुद को छिपाने के लिए छद्म आवरण बना लेती हैं।
टूना मछली 70 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से तैरती है।
क्लीनर फिश दूसरी मछलियों के आसपास मौजूद परजीवों व उनके स्केल्स पर मौजूद डेड स्किन को नष्ट कर
देती हैं।
जेलीफिश व क्रेफिश के नाम से इसे मछली कभी मत समझना। नाम जरूर फिश है, पर ये असल में मछली नहीं।
मर्मेड यानी जलपरियों का नाम तुमने काफी कहानियों में सुना होगा, जिनकी पूंछ मछली की तरह होती है, लेकिन ऊपरी हिस्सा युवती वाला होता है और ये पानी में रहती हैं।
सभी मछलियों के पास रीढ़ की हड्डी यानी बैकबोन होती है, तभी वे वर्टिब्रेट (कशेरुकी) जन्तु कहलाती हैं।
अपने गिल्स यानी गलफड़े का प्रयोग कर वे सांस भी लेती हैं।
इनके पास एक जोड़ी पंख होते हैं, जिन्हें फिन्स के नाम से जानते हैं। ये पंख तैराकी में इनकी मदद करते हैं। साथ ही इनके शरीर का आकार भी तैराकी के अनुकूल ही होता है।
पानी में पाए जाने वाले सभी जानवर मछली नहीं होते। जेलीफिश, स्टारफिश और ऑक्टोपस इनवर्टिब्रेट्स हैं यानी इनके पास रीढ़ की हड्डी नहीं होती और न ही ये मछली की प्रजाति में आती हैं।
दक्षिणी कैरोलिना के तटीय क्षेत्र में एक मरीन साइंस इंस्ट्रक्टर को 5.5 मीटर यानी कि 18 फुट लंबी मछली का कंकाल मिला है। यह इलाका कैटालिना द्वीप के करीब है। यह ओरफिश का कंकाल है।

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