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मुंबई-देहरादून एक्सप्रेस में आग, 9 की मौत, कई लोग घायल

मुंबई-देहरादून एक्सप्रेस में आग, 9 की मौत, कई लोग घायल

ठाणे जिले में आज तड़के बांद्रा-देहरादून एक्सप्रेस के तीन डिब्बों में आग लग गयी जिससे नौ लोगों की मौत हो गयी। एक पखवाड़े में ट्रेन में आग की यह दूसरी घटना है। रात में करीब 2 बजकर 50 मिनट पर तीन कोचों में से एक में आग लगी और यह धीरे-धीरे अन्य दो कोच में फैल गई। उस समय यात्री सो रहे थे।

पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी शरतचंद्र ने कहा कि 9 मृतकों में एक महिला और 4 पुरुष हैं। बाकी लोगों की पहचान अभी नहीं हो पायी है। पुलिस ने बताया कि चार लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। एस-2 एस-3 और एस-4 कोच प्रभावित हुआ। एस-4 में 64 यात्री थे। एस-2 और एस-3 में 54 यात्री थे।
   
रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने यात्रियों की मौत पर दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अरुणेंद्र कुमार ने कहा कि गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को एक-एक लाख रुपये तथा मामूली रूप से घायल लोगों को 50-50 हजार रुपये की राशि दी जाएगी।
   
कुमार ने कहा कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त आग लगने की घटना की जांच करेंगे। उन्होंने कहा कि आग के कारणों का अभी पता लगाया जाना है। हालांकि, आग पर काबू पा लिया गया है और ट्रेन अपने आगे के गंतव्य के लिए रवाना हो गई है। 

रेलवे सूत्रों ने बताया है कि शार्ट सर्किट से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि एस-3 कोच के बिजली बोर्ड के भीतर जला हुआ तार पाया गया। शरत चंद्र ने कहा कि फाटक पर तैनात एक गेटमैन ने ट्रेन में आग देखी और तत्काल ही ट्रेन में मौजूद गार्ड को इसकी सूचना दी।
   
गार्ड ने इसके बाद मोटरमैन को सूचित किया और जिसके बाद ट्रेन रोक दी गई। चंद्र ने कहा कि फाटक पर तैनात गेटमैन की मुस्तैदी से एक बड़ा हादसा टल गया। ट्रेन को घोलवाड रेलवे स्टेशन पर दहानु मार्ग के पास रोका गया। यहां आग पर काबू पा लिया गया।
   
उत्तरी रेलवे ने ट्रेन और यात्रियों की सूचना चाहने वालों के लिए हेल्पलाइन नंबर- 23342954 और 24355954 की घोषणा की है। बंगलुरु ट्रेन हादसे के कुछ दिन के बाद ही यह हादसा हुआ है। 28 दिसंबर को बंगलुरु-नांदेड़ एक्सप्रेस में आग लगने से दो बच्चों सहित 26 लोग मारे गए थे और 12 घायल हो गए थे।

पांच साल में मरे 1220 लोग
-भारत में पिछले पांच साल में विभिन्न रेल हादसों में 1200 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है और मानवरहित क्रासिंग पर हुए हादसों में 717 लोगों की मौत हुई है।

-ट्रेन हादसों में सबसे अधिक लोगों की जान 2010 से 2011 के बीच गई। इस दौरान मरने वालों की संख्या 374 रही।

-2006-2007 में 208, 2007-2008 में 191, 2008-2009 में 209 तथा 2009-2010 में 238 लोगों की मौत हुई।

कुछ बड़े रेल हादसे
- 23 फरवरी 1985 को मध्यप्रदेश में राजानंदगांव एक्सप्रेस में आग से 50 से ज्यादा लोगों की मौत।

- 16 अप्रैल 1990 को पटना में शटल ट्रेन में आग लगने से 70 लोगों की मौत।

- 10 अक्टूबर 1990 को आंध्रप्रदेश के निकट चेरापल्ली में ट्रेन में आग लगने से 40 लोगों की मौत।

- 26 अक्टूबर 1994 को मुंबई-हावडा मेल में आग लगने से 27 लोगों की मौत।

- 15 मई 2003 को गोल्डन टेम्पल मेल में आग लगने से 36 लोगों की मौत।

- 18 अगस्त 2006 को चेन्नई-हैदराबाद एक्सप्रेस में आग, कोई हताहत नहीं।

- 18 अप्रैल 2011 को मुंबई-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में आग। रेलवे की सावधानी के चलते कोई यात्री हताहत नहीं हुआ।

- 12 जुलाई 2011 को नई दिल्ली-पटना राजधानी एक्सप्रेस में आग।

- 22 नवंबर 2011 को हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस में आग, 7 लोगों की मौत।

आग रोकने के लिए सरकार के उपाय
-रेलवे के मानक नियमों के अनुसार फ्यूल पाइंट के समीप अग्निकांड आदि रोकने के लिए बालू रेती से भरी बाल्टियाँ होना अनिवार्य है।

-इसके अलावा मंत्रालय ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) तथा सादे कपड़ों में पुलिस बल के जवानों को तैनात करने का निर्णय किया है।

रेलवे ने लिया सबक
-आग लगने की तुरंत सूचना मिलने के उद्देश्य से रेलवे ने लगभग 290 ट्रेनों में फायर अलार्म सिस्टम लगाने की भी घोषणा की है।

- इसके साथ ही राजधानी ट्रेनों में जर्मन तकनीक से बने एलएचबी कोच लगाने की घोषणा की गई है, जो आग को तेजी से फैलने से रोकते हैं।

एकीकृत सुरक्षा प्रणाली
-रेलवे सुरक्षा की समस्याओं का अध्ययन करने के बाद समूचे रेलवे नेटवर्क के 202 महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों पर एकीकृत सुरक्षा प्रणाली का प्रस्ताव किया गया है।

-रेल मंत्रालय ने व्यापक चर्चाओं के बाद महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ‘एकीकृत सुरक्षा प्रणाली’ की स्थापना की मंजूरी दी है।

आग लगने पर क्या करें
- आग लगने की सूचना आपातकालीन अलार्म या इंटरकॉम की मदद से तुरंत ही ड्राइवर या ट्रेन में मौजूद रेलवे अधिकारी को दें।

- जिस डब्बे में आग लगी है उसे तुरंत खाली कर दें और अगले डब्बे में चले जाएं।

- अगर आप ट्रेन के अंतिम डब्बे में हैं तो आपातकालीन खिड़की या दरवाजे की मदद भी ले सकते हैं।

- जैसे ही आपको लगे की आप खतरे से बाहर हैं, तो तुरंत घटना की सूचना आपातकालीन सेवा पर दें।

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