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15 नबम्बर, 2019|10:02|IST

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लेकिन निवेशकों का डूबा धन कैसे मिले?

ानपुर के कल्याणपुर में रहने वाली मिथिलेश साहू ने आशमा फाइनेंस में डेढ़ लाख रुपएोमा कराए थे। 1में कम्पनी फरार हो गई। मिथिलेश की तरह सैकड़ों लोगों का करोड़ों रुपया भी डूब गया। 1मई 08 को इस कम्पनी के संचालक फूलचन्द शर्मा व कमल दुबे को फतेहपुर के अपर न्यायिक मािस्ट्रेट ने सात साल की साा सुनाई, लेकिन मिथिलेश इस फैसले से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि उनकी डूबी रकम तो मिलेगी नहीं। मिथिलेश की ही तरह पिछले नौ साल में फरार हुई र्दानों फाइनेंस कम्पनियों के निवेशक अब भी अपनी एफडी व पासबुक इसी उम्मीद में सँाोए बैठे हैं कि शायद सिटी को-आपरटिव बैंक (सीसीबी) के ग्राहकों की तरह उन्हें भी कुछ पूँाी वापस मिलोाए।ड्ढr 1व 1में फाइनेंस कम्पनियों के भागने काोो सिलसिला शुरू हुआ था, वहोारी है। त्रिकोण, कुबेर, लायन्स, केडीटी, अपेस, गोल्डेन फॉरस्ट फ्रेश प्लांटेशन समेत कई फाइनेंस कम्पनियों के निदेशक रातों-रात भाग निकले। इनके खिलाफ र्दा सैकड़ों मुकदमों में पुलिस ढंग से तफ्तीश ही नहीं कर सकी। लिहा अधिकतर कम्पनियों के मामले आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दिए गए थे। ईओडब्ल्यू के डीआईाी वीके अग्रवाल कहते हैं कि उनके यहाँ कईोाँच चल रही हैं। इनमें से कई पूरी होने वाली हैं। निवेशकों को सिर्फ यह चिन्ता है कि आखिर उनके रुपए कैसे मिलेंगे? केडीटी व फ्रेश प्लान्टेशन में लाखों रुपएोमा करने वाले निवेशक प्रमिला सिंह, तारा साहू व शिशिर गुप्ता का कहना है कि अफसरों ने उन्हें यह सपना दिखाया था कि इन कम्पनियों की सम्पत्ति बेचकर उनका रुपया दियाोाएगा पर इस इंताार में बस साल-दर-साल गुारते हीोा रहे हैं। अफसर का रटा-रटायाोवाबड्ढr अफसर तो बस यही कहते हैं कि 2007 में शासन को प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑफ इनवेस्टर्स एक्ट लागू करने का प्रस्ताव ोा गया था। इसमें यह था कि फरार कम्पनियों की सम्पत्ति नीलाम कर निवेशकों को उनकी डूबी रकम दिलाईोाए, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ। कुछ पुलिस अफसरों का कहना है कि वे इस एक्ट को लागू कराने के लिए भाग-दौड़ कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह एक्टोल्दी लागू होोाएगा। क्या कर सकते हैं लुटे-पिटे निवेशकड्ढr अफसरों का कहना है कि फरार कम्पनियों के चंगुल में फँसे हर निवेशक को थाने पर सूचनाोरूर दीोानी चाहिए। क्योंकि अगर नया बन रहा एक्ट लागू होता है तो डूबी रकम का आकलन यादा आसान होगा।

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