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सत्ता को देश व गरीब परस्त होना चाहिए : पाटिल

जमशेदपुर वरीय संवाददाता। जब तक सत्ता देश और गरीब परस्त नहीं होगी तब तक हिन्दुस्तान का कल्याण नहीं होगा। सरकार का अर्थ पारदर्शी शासन व्यवस्था उपलब्ध कराना तथा अंतिम एवं दुर्बल व्यक्ति की रक्षा करना होता है। ये बातें राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के राष्ट्रीय सह संयोजक बासव राज पाटिल ने कहीं। वे मंगलवार को सर्किट हाउस में आंदोलन की जिला कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि हमारी संस्था महान विचारक गोविन्दाचार्य जी के नेतृत्व में जिन मुख्य विषयों पर लगभग 10 साल से काम कर रही है, उनमें ईवीएम में नोटा बटन का प्रावधान और भूमि सुधार अधिनियम जैसी सफलताएं शामिल हैं। व्यवस्था परविर्तन का मतलब सत्ता परविर्तन नहीं पाटिल ने कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में व्यवस्था परविर्तन का मतलब सत्ता परविर्तन नहीं होता। जब तक समाज सत्ता के पीछे रहेगा, राष्ट्र का विकास और भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हो सकता है। इसके लिए जरूरी है कि सत्ता समाज के पीछे खड़ी हो।

वर्तमान शासन सत्ता भी इसी वसिंगतियों का शिकार है और आम आदमी उद्वेलित। पूरे देश में आंदोलनरत है संगठनबैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला संयोजक डीडी त्रिपाठी ने कहा कि संगठन अभी पूरे देश में आंदोलनरत है।

हमारी मांग है कि बजट का 7 प्रतिशत हिस्सा सीधे ग्राम पंचायतों को मिले, जरूरी खर्चो में पारदर्शिता लाई जाए, 10 लाख लोगों पर 50 जजों नियुक्ति सुनशि्चित हो और सरकारी स्तर से स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। बैठक ये लोग थे उपस्थित बैठक में झारखंड प्रभारी गजाधर विद्रोही, मुकुल मिश्रा, लक्ष्मी सिंह, संजय पाठक, प्रताप नारायण सिंह, राम आसरे अवस्थी, शैलेश पाठक, महंत जय प्रकाश तिवारी, विजय कुमार सिंह, सुनील सिंह, डॉ. उपेंद्र सिंह अजीम खान सहित दर्जनों सदस्य शामिल हुए।

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