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बिहार तय कर सकता है एजेंडा!

पटना। विशेष प्रतिनिधि। बिहार 14वें वित्त आयोग का एजेंडा तय कर सकता है। आयोग की टीम के रुख से भी इसके संकेत मिल रहे हैं। खासकर केन्द्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 32 फीसदी से बढ़कर 40 फीसदी तक होने का अनुमान है।

बिहार ने आयोग को सौंपे ज्ञापन में न सिर्फ बिहार के पिछड़ेपन और इसके कारणों का तार्किक और विस्तार से उल्लेख किया है, बल्कि राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बिहार समेत अन्य पिछड़े राज्यों के कमतर योगदान को राष्ट्रीय विकास दर में अस्थिरता का मूल कारण बताकर एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है।

बिहार का तर्क है कि इस राज्य की आबादी 10. 38 करोड़ यानी देश की 8. 6 फीसदी है, लेकिन नेशनल जीडीपी में इसका योगदान 3 फीसदी से भी कम है, जबकि इसने बीते आठ वर्षो में 10. 3 फीसदी की विकास दर कायम रखी है।

बिहार समेत तमाम ऐसे राज्य अगर पिछड़ापन से बाहर आ जाते हैं तो देश के जीडीपी में उनका बड़ा योगदान होगा और इससे देश की विकास दर न केवल बढ़ेगी, बल्कि इसमें स्थिरता भी आएगी।

इस अर्थ में बिहार पिछड़े राज्यों का पैरोकार बनकर उभरा है। विकास की नीति पर अहम सवालआयोग के समक्ष बिहार ने देश की विकास नीति के स्तर पर कई बड़े सवाल भी खड़े किए हैं। पहला टैक्स में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी का है।

अभी यह 32 प्रतिशत है। बिहार ने इसे 50 फीसदी करने का सुझाव दिया है। 14वें वित्त आयोग के टर्म्स आफ रेफरेंस में जनसंख्या का आधार 1971 की जनगणना को बनाया गया है। बिहार ने इसे अतार्किक करार देते हुए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की मांग रखी है।

तीसरा अहम सवाल है पिछड़ापन तय करने का आधार प्रति व्यक्ति खपत के बजाय प्रति व्यक्ति आय को बनाने का सुझाव दिया गया है। इसी तरह अत्यधिक केन्द्र प्रायोजित योजनाएं राज्यों पर थोपने की नीति का भी बिहार ने तार्किक विरोध किया है।

तर्क है कि राज्यों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएं बनाने का अवसर दिया जाए। केन्द्र सरकार जो योजनाएं शुरू करती है, उसका खर्च वह खुद उठाए। खासकर खाद्य सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार के तहत चलने वाली योजनाओं में यह प्रावधान जरूरी है।

इससे राज्यों का पैसा बचेगा और वह अपनी जरूरतें पूरी कर पाएंगे। राजनीतिक दलों की एका को सराहाविकास के सवाल पर बिहार में राजनीतिक दलों के एक स्वर देखकर आयोग की टीम अचंभित रही। उसने इसे सराहा भी और कहा कि सिफारिशे करने से पहले वह बिहार से मशविरा करेगा।

राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को सौंपे गए मेमोरेंड़ा की भी आयोग ने खूब तारीफ की। 14वें वित्त आयोग ने अब तक 15 राज्यों का दौरा किया है। उसने माना है कि इस तरह का मेंमोरंड़ा बिहार का पहला है।

वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने अपने संबोधन में कहा कि उन लोगों ने पंद्रह राज्यों का अब तक दौरा किया है। सभी जगह मेमोरेंड़ा मिले हैं पर इस तरह का बेहतर ज्ञापन कहीं नहीं मिला। संपूर्ण तथ्य और आंकड़े, मांग को तर्कसंगत बनाते हैं।

बिहार अन्य राज्यों के लिए इस मामले में माडल बन सकता है। वित्त आयोग की टीम ने बिहार की मांगों पर सैद्धांतिक सहमति भी दी। बिहार ने विशेष राज्य के दर्जा की मांग पर कायम रहते हुए वित्त आयोग से इसके तहत मिलने वाली रियायतों के समान विशेष आर्थिक मदद का दावा भी पेश किया है।

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