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फिर ठिठुरा उत्तर बिहार, सर्द हवा ने बढ़ाई परेशानी

मुजफ्फरपुर। वरीय संवाददाता। मुजफ्फरपुर समेत पूरे उत्तर बिहार के तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है। सोमवार को अच्छी धूप निकलने से अधिकतम व न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हुई थी, वहीं मंगलवार को आसमान में बादल छाने व तापमान में कमी आने से समूचे उत्तर बिहार में एक बार फिर शीतलहर चलने लगी है।

न्यूनतम तापमान में डेढ़ व अधिकतम तापमान में एक डिग्री की कमी आने से यह आठ व 19.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बादल छाने व सर्द पछिया हवा चलने से दिन के 10 बजे अधिकतम तापमान 12 डिग्री था। मौसम विभाग ने अलगे तीन से चार दिन तक शीतलहर चलने की संभावना जताई है। अब अगले सप्ताह से ठंड से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मंगलवार को दिन में धूप निकलने के बाद भी सात से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली बर्फीली पछिया हवा से शाम ढलते ही लोग परेशान हो उठे।

इसके कारण शाम होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। शाम चार बजे से अधिकतम तापमान में तेजी से कमी का शुरू हुआ सिलसिला अहले सुबह तक जारी रहा। हवा की रफ्तार तेज होने से लोग रात में अत्यधिक ठंड से कनकनी का अनुभव करते रहे। हवा में नमी की मात्रा 85 प्रतिशत तक होने व इसकी रफ्तार 10 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने से वास्तविकता से दो डिग्री कम लोगों को ठंड का अहसास हुआ। सिंचाई के साथ करें दवा का छिड़काव मौसम विभाग ने शीतलहर से फसलों व पशुओं के बचाव के लिए किसानों को कई सुझाव दिये हैं।

समय पर बोयी गई गेहूं व मक्का की फसल में सिंचाई के साथ किसान प्रति हेक्टेयर 40 किलो नेत्रजन (यूरिया) का छिड़काव करें। तम्बाकू, राजमा, तेलहन, मक्का व सब्जियों में भी सिंचाई आवश्यक है। अरहर की फसल को फली छेदक कीट से बचाव के लिए प्रोफेनोफॉस 50 ईसी दवा दो मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। आलू के साथ केला, पपीता व टमाटर की फसलों को झुलसा से बचाव के लिए सिंचाई करें। आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाव के लिए इंडोफिल एम-45, साइनोमैक्सी या मैंकोजेव दवा का दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

आयस्टर या बटन मशरूम के बेहतर उत्पादन के लिए घर को कृत्रिम रूप से गरम रखने का प्रबन्ध करें। दुधारू पशुओं के रखरखाव व खानपान पर विशेष रूप से ध्यान दें। पशुओं के खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ा दें। उन्हें खुले स्थान पर नहीं रखें व बिछावन के लिए सूखी घास या राख का उपयोग करें।

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