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सरकार पर भारी पड़ रहे अफसर

राज्य के लगभग ढ़ाई दर्जन पुलिस अधिकारियों की समझ में नहीं आ रहा है कि अब वे किसके आगे फरियाद लगाएं। मंत्रिपरिषद ने भी 24 दिन पहले उनकी प्रोन्नति का फैसला कर दिया है। इसके बावजूद अधिसूचना जारी नहीं हो रही है। मंत्रिपरिषद के फैसले पर भी लालफीताशाही हावी हो गई है। 3 जून को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के 2पुलिस उपाधीक्षकों को एएसपी के पद पर प्रोन्नति दी गई। इसमें 20 पुलिस उपाधीक्षकों को एएसपी के पद पर प्रोन्नत किया गया जबकि पुलिस उपाधीक्षक पहले वरीय होंगे और इसके बाद एएसपी में प्रोन्नत होंगे।ड्ढr ड्ढr इस फैसले के बाद राज्य में डीएसपी के पद पर तैनात अधिकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। प्रोन्नति को लेकर उन्हें हाई कोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़ी थी। इसके बाद कहीं जाकर मंत्रिपरिषद ने यह फैसला किया था। प्रोन्नति पाने वाले सभी अधिकारी 1बैच के अधिकारी थे और लगभग 23 वर्षो के सेवा काल के बाद उन्हें पहली प्रोन्नति सरकार द्वारा दी जाने वाली थी। दरअसल बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने के पहले कई प्रोन्नति पाते हैं लेकिन पुलिस सेवा के अधिकारियों को यह सुविधा नहीं थी। इसके खिलाफ पुलिस उपाधीक्षक हाई कोर्ट गए और 2006 में राज्य सरकार ने उन्हें आईपीएस मिलने के पहले स्टाफ अफसर, सीनियर डीएसपी और एएसपी में प्रोन्नति देने की बात मान ली थी। इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने कुछ अधिकारियों को एएसपी के पद पर प्रोन्नति भी दी लेकिन इस बार बड़ी संख्या में अधिकारियों की सूची तैयार थी लिहाजा इसपर सबकी नजर लगी हुई थी। हैरत की बात यह थी कि अधिकारियों को प्रोन्नति देने का प्रस्ताव गृह विभाग से ही मंत्रिपरिषद के पास गया था और इसके बावजूद इसकी अधिसूचना गृह विभाग से जारी नहीं हो रही है।ं

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