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एनएच-स्टेट हाइवे पगडंडियों में तब्दील

टूटी जर्जर सड़क को मुख्य मुद्दा बनाकर बिहार की हुकूमत बदलने वाले नीतीश कुमार के शासनकाल में भी कोसीवासी एक बार फिर छले जा रहे हैं। कोसी प्रमंडल के सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिले में लगभग एक हाार कि.मी. में बिछी स्टेट हाइवे और एनएच की हालत पगडंडियों से भी बदतर है। सुशासन के तीन वर्ष पूर होने को है लेकिन जर्जर सड़कों को चकाचक कर देने के दावे की असली सच्चाई कोसी में आकर खुल जाती है।ड्ढr ड्ढr सहरसा जिले में एन.एच. 107 सोनवर्षा माली चौक से सिमरी बख्तियारपुर भाया बरियाही सहरसा होते मधेपुरा की ओर जाता है। एनएच का दर्जा मिले 7 वर्ष से अधिक समय गुजर गया लेकिन कहीं भी पूरी तरह सड़क बन नहीं पायी। सिर्फ सहरसा से मधेपुरा 20 कि.मी. सड़कें चलने लायक है। स्टेट हाइवे में बैजनाथपुर से सोनवर्षा के बीच काम चल रहा है। स्टेट हाइवे की सबसे खराब स्थिति सुपौल जिले की है जहां एक कि.मी. सड़क भी चलने लायक नहीं है। वीरपुर-पिपरा (45 कि.मी.) तक मेटल बिछा कर छोड़ दिया गया। दो स्टेट हाइवे में एक भपटिया-पिपरा-त्रिवेणीगंज-ादिया (76 कि.मी.) और दूसरा सहरसा-सुपौल सिंघेश्वर (36 कि.मी.) की स्थिति और दयनीय है। बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग के सचिव राज कुमार सिंह के गृह, जिले की सड़कों की हालत ऐसी हो तो अन्य जिलों का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है।

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