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अब एड्स के खिलाफ शंकराचार्य भी उतरे

और अब एचआईवीएड्स के खिलाफ लड़ाई में शामिल हुए पुरी के शंकराचार्य। शुक्रवार को राजधानी में पहली बार स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने मंच से लोगों को इस जानलेवा बीमारी से सचेत और सावधान रहने का आह्वान करते हुए कहा कि अभी नहीं संभलने से देर हो सकती है। स्वामीजी ने कहा कि विकास और वैज्ञानिकता के नाम पर हमने सनातन धर्म की अच्छी चीजों को दरकिनार कर दिया। उन्होंने चार आश्रमों में बंटी भारतीय जीवन पद्धति को सबसे उत्तम बताया। शंकराचार्य ने कहा कि अर्थ और काम के अमर्यादित आचरण ने इस समस्या को और गंभीर बनाया है। वे स्थानीय दादीजी मंदिर सभागार में मर्यादित जीवन और एचआईवीएड्स विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। इसका आयोजन रतनई, अतंरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन और पहल के सौजन्य किया गया।ड्ढr ड्ढr स्वामीजी ने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि रोगों से लड़ने और उससे बचाव के लिए व्यक्ित से ज्यादा जरूरी समाज और देश की मर्यादा है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर हम जल, जमीन, हवा, प्रकाश आदि की शुद्धता का हरण कर रहे हैं। इस सिर्फ चिंता व्यक्त करने से कुछ नहीं होगा, इसके लिए शासकों की ओर से सार्थक पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि भारत और विश्व में विकास का जो प्रारूप तैयार किया जा रहा है, उसमें हर व्यक्ित को चिकित्सक और हर घर को चिकित्सालय अना देने के बावजूद रोगों से मुक्ित नहीं मिल सकती। इस मौके पर लोक स्वास्थ्य एवं अभियंत्रण मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि ब्लाक स्तर पर एचआईवी के जांच की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। उन्होंने कहा कि संक्रमितों के पुनर्वास का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर रतनई के चिकित्सा निदेशक डा. दिवाकर तेजस्वी ने कहा कि शंकराचार्य को इस अभियान के साथ जोड़ने का यह पहला प्रयास है और इसका लोगों पर सकारात्मक असर होगा। कार्यक्रम को बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के परियोजना निदेशक एच एन झा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन नीलिमा गुप्ता और धन्यवाद ज्ञापन आनंद द्विवेदी ने किया।

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