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कैफ की आईपीएल से विदाई वार्न का पेशेवर नजरिया

यह निर्णय उन राज्य चयनकर्ताओं के लिए एक नजीर है, जो खिलाड़ियों के कद से प्रभावित होकर अपने फैसले लेते हैं। कैफ के मामले में शेन वार्न जैसा पेशेवर कप्तान ही ऐसा निर्णय ले सकता था। राजस्थान रायल्स की टीम से मो. कैफ की शर्मनाक विदाई ने यूपी के इस खिलाड़ी के अन्तरराष्ट्रीय कॅरिअर पर एक तरह से विराम लगा दिया है। एक दिवसीय और टेस्ट टीम में वापसी की फिलहाल दूर-दूर तक कोई संभावनाएँ नजर भी नहीं आ रही। टी-20 क्रिकेट के इस लघु संस्कण को विश्व कप का सलेक्शन टूर्नामेंट भी माना जा रहा है। लेकिन जब वार्न ने आईपीएल में ही कैफ को खारिज कर दिया, तब भारतीय टीम में उनके लिए जगह निकलने की बात सोचना भी मूर्खतापूर्ण होगा। यूपी के कप्तान को सबसे ज्यादा कसक निकाले जाने के तरीके पर होगी। कैफ शायद सोच रहे होंगे कि यह निर्णय भारत में ही हो जाता तो इस तरह दक्षिण अफ्रीका से अपमान जनक वापसी की जिल्लत तो न उठानी पड़ती। कैफ के लिए यूपी में टीम इंडिया के खिलाड़ियों की कप्तानी करना पहले ही काफी कष्टप्रद साबित हो रहा था। लेकिन इस घटना के बाद तो साथी खिलाड़ियों के बीच उनका रुतबा और भी घट सकता है। इसके अब अलावा यूपी और सेन्ट्रल जोन में उनकी कप्तानी पर भी सवाल उठने लगेंगे। वैसे यह भी सच है कि कैफ आईपीएल के पहले संस्करण में ही अपनी प्रभाव छोड़ने में असफल रहे थे। अपने देश के विकेटों पर कैफ ने 16 मैचों की 14 परियों में तीन बार नाबाद रहते हुए 16 के औसत से 176 रन बनाए थे। इसमें दिल्ली डेयर डेविल और चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ 34-34 रनों की पारी ही उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा था। कैफ को निकाले जाने का आधार उनका यही प्रदर्शन माना जा रहा है। शायद वार्न के दिमाग में रहा हो कि जो खिलाड़ी घरलू संस्करण में ही नहीं चल सका उससे दक्षिण अफ्रीका की उछालयुक्त विकटों पर क्या उम्मीद रखी जाए।

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