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उमा भारती होंगी अलीगढ़ से भाजपा प्रत्याशी!

रामकुमार शर्मा, अलीगढ़। भाजपा ने अपनी खोई सीटों को पाने के लिए रणनीति बना ली है। पार्टी की योजना है कि दस सीटों में से किसी एक सीट पर ऐसा प्रत्याशी उतारा जाए, जिसकी धमक निकटवर्ती सीटों पर भी सुनाई दे। इसी क्रम में अलीगढ़ से भाजपा की फायरब्रांड नेता उमा भारती को मैदान में उतारने का निर्णय लिया गया है।

पार्टी का मानना है कि इससे न केवल अलीगढ़ बल्कि मथुरा, आगरा, एटा, कासगंज तथा बदायूं तथा बुलंदशहर, मेरठ तक की सीटों पर भाजपा का सांप्रदायिक कार्ड काम करेगा। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए उमाभारती की टीम के वशि्वस्त लोग अलीगढ़ में डेरा डाल चुके हैं। अलीगढ़ के आभा रीजेंसी होटल में उमा भारती के वशि्वस्त सलाहकार ने भाजपा व संघ के लोगों से मुलाकात की। यह उनकी पांचवी यात्रा थी। वशि्वस्त सूत्रों का कहना है कि शुरू में उमा भारती की योजना झांसी से चुनाव लड़ने की थी।

नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद उन्होंने अलीगढ़ से चुनाव लड़ने का मन बनाया है। पार्टी का मानना है कि अलीगढ़ लोकसभा सीट पारंपरिक रूप से भाजपा की सीट रही है। पार्टी की वरिष्ठ नेता शीला गौतम चार बार लगातार इस सीट से सांसद रहीं। 2004 के चुनाव में कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह ने यह सीट हथिया ली। पिछले चुनाव में भाजपा से यह सीट बसपा प्रत्याशी राजकुमारी चौहान ने छीन ली। इस चुनाव में कल्याण सिंह द्वारा सपा का दामन थामने के कारण कल्याण समर्थक मतदाता भाजपा से छिटक गए।

भाजपा की योजना इस चुनाव में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद उपजे आक्रोश को भुनाने की है। सपा पहले ही जफर आलम को लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। भाजपा से राहुल गौतम, राजेश भारद्वाज, आशुतोष वाष्र्णेय, सतीश गौतम, रघुराज सिंह, मुनीष गौड़, मेयर शकुंतला भारती, डा. उमेश कुमारी आदि टिकट की लाइन में हैं। ऐसे में उमा भारती के चुनाव लड़ने से चुनाव सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का फायदा पार्टी को केवल अलीगढ़ ही नहीं वरन निकटवर्ती सीटों पर भी मिलेगा। अलीगढ़ में भाजपा का संगठन भी बिखरा हुआ है।

उमा भारती के चुनाव लड़ने की स्थिति में विभिन्न धड़ो में बंटी पार्टी एकजुट हो सकेगी, इसका लाभ संगठन को भी मिलेगा। एक अन्य कारण अलीगढ़, एटा, कासगंज, बदायूं, हाथरस, बुलंदशहर तक लोध वोट व अन्य पिछड़ी जातियों को एकजुट करने का भी है। कल्याण सिंह व उमा भारती के अलीगढ़ मंडल से चुनाव लड़ने से इस पूरी बेल्ट में पार्टी अपना पारंपरिक पिछड़ा वोट फिर से अपनी झोली में लाने में सफल होगी। उमाभारती के सलाहकार अलीगढ़ सीट पर जाट समाज को लेकर पसोपेश में हैं।

अलीगढ़ लोकसभा सीट पर खैर विधानसभा में जाट मतदाता बहुतायत में हैं। इन मतदाताओं ने पिछली बार पूर्व मंत्री जयवीर सिंह की पत्नी राजकुमारी चौहान के पक्ष में मतदान कर उन्हें सांसद बनाया था। पार्टी का मानना है कि मुजफ्फरनगर दंगे के बाद जाट मतदाता सपा से आक्रोशित हैं। उमा भारती के अलीगढ़ से चुनाव लड़ने की स्थिति में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की लहर में जाट मतदाता भी उसमें शामिल हो जाएंगे। वर्जनऐसी कोई आधिकारिक जानकारी अभी नहीं है। पार्टी हाईकमान द्वारा जो भी प्रत्याशी तय किया जाएगा, पूरी पार्टी उसे जिताने का काम करेगी।

---देवराज सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष।

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