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कैंट की 12 हजार में 177एकड़ जमीन ही छुड़ाई गई

देश भर में राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने कैंट की करीब 12 हजार एकड़ जमीन कब्जा रखी है। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने खुद संसद में यह जानकारी दी थी। मगर उन्होंने यह नहीं बताया था कि रक्षा मंत्रलय इसमें से कितनी जमीन वापस ले पाया है।

हिन्दुस्तान टाइम्स को आरटीआई के जरिए पता चला है कि गत तीन वर्षों में मंत्रालय इसमें से महज 177 एकड़ जमीन ही वापस ले सका है। एचटी द्वारा जुटाए गए दस्तावेज बताते हैं कि 1997 में कैंट की 6,903 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा था, जो वर्ष 2013 तक बढ़कर 12,300 एकड़ तक पहुंच गया।

इससे पहले जुलाई 2011 में एंटनी ने रक्षा भूमि महानिदेशालय (डीजीडीई) को निर्देश दिया था कि वह देश भर में रक्षा भूमि की स्थिति पर ऑडिट करे। इस ऑडिट की आंच आदर्श हाउसिंग घोटाले के साथ-साथ दो अन्य बड़े मामलों कांदिवली (मुंबई)  और लोहेगांव (पुणे) तक भी पहुंच गई थी।

एंटनी ने अधिकारियों से कहा था कि राज्यों और निजी क्षेत्र के खिलाड़ियों द्वारा कैंट की जमीन के कब्जे पर पैनी नजर रखी जाए। और इस तरह के किसी भी कोशिश को कामयाब न होने दिया जाए। रक्षा मंत्री के इन सख्त निर्देशों का भी कोई खास असर नहीं दिखाई दिया।

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक मार्च 2010 से मार्च 2013 के बीच गुजरात, केरल, अरुणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़ और झारखंड में कैंट एरिया से कोई कब्जा नहीं हटवाया जा सका। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 3079 एकड़ जमीन कब्जाई गई है, जबकि महाराष्ट्र 2500 एकड़ के साथ इस सूची में दूसरे नंबर पर है। अभी तक यूपी और महाराष्ट्र में क्रमश: 44 और 13 एकड़ जमीन ही कब्जे से छुड़ाई जा सकी है।

डीजीडीई के एडिशनल डीजी पी डेनियल ने बताया कि रक्षा प्राधिकरणों ने पूर्व में खेती के मकसद से लीज पर जमीन दी थी। करीब 2582 एकड़ जमीन अब भी इस तरह की लीज पर है। उन्होंने निजी कंपनियों द्वारा कब्जाई गई जमीन का ब्योरा नहीं दिया।

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