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बिल जमा करने के नाम पर लगा रहे चूना

पैसे लेकर फर्जी रसीद देने का विद्युत निगम में खेल चल रहा है। लाइन में लगे बिना बिजली जमा करने के लालच में उपभोक्ता ठगी का शिकार हो रहे हैं। ताजा मामला मुरादनगर क्षेत्र का है। यहां उपभोक्ता को 12 हजार रुपये लेकर फर्जी रसीद दे दी गई। उपभोक्ता चक्कर काट रहा है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है।

इस खेल में विभागीय कर्मचािरयों के शामिल होने की भी आशंका जताई गई है। विद्युत निगम में फर्जी रसीद देकर उपभोक्ताओं के ठगने का गिरोह सक्रिय हो गया है। विजय नगर क्षेत्र के बाद अब मुरादनगर में भी फर्जी रसीद देने का मामला सामने आया है। मुरादनगर में गंगा वहिार निवासी मुकेश कुमार ने घरेलू कनेक्शन ले रखा है। उसका 12,209 रुपये का बिल आ गया। वह बिल जमा करने के लिए बिजलीघर गया। मुकेश का वहां के एक कर्मचारी को पैसे दे दिए।

उसने एक दिन बाद रसीद ले जाने को कहा। उस व्यिक्त ने 12,209 रुपये की रसीद दे दी। मुकेश ने समझा कि उसका बिल जमा हो गया। सोमवार को बिजली कर्मचारी उसके घर पहुंचे और बकाया बिल होने की बात कहकर कनेक्शन काटने लगे। मुकेश ने बताया कि उसने बिल जमा कर दिया है और रसीद भी दिखाई। बिजली कर्मचािरयों ने बताया कि आपका बिल बकाया है। उन्होंने रसीद को फर्जी बताया। मुकेश एसडीओ से मिले और अपनी बात बताई।

मुकेश का आरोप है कि एसडीओ ने समस्या के समाधान का आश्वासन तक नहीं दिया। मुकेश ने कहा कि वह मुख्य अिभयंता से मिलेंगे। इस बारे में मुख्य अिभयंता पीके माहेश्वरी का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। इस बारे में वह संबिंधत अधिकारियों से बात करेंगे। वह मामले की जांच कराएंगे। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विजय नगर में भी आ चुके हैं ऐसे मामलेविजय नगर क्षेत्र में भी ऐसे मामले आ चुके हैं। इस इलाके के दर्जनों लोगों को इस तरह ठगा जा चुका है।

नवंबर में एक्सईएन ने इस गिरोह के 5 लोगों को पकड़ लिया था। ये लोग उपभोक्ताओं से जल्दी बिल जमा करने का झांसा देते थे और लोगों को ठग लेते थे। कुछ लोगों को फर्जी रसीद भी दे देते थे। विद्युत निगम ने सभी आरोिपयों को पुलिस को सौंप दिया। सभी को जेल भेज दिया था। ----मीटर रीडरों के लिए लागू नहीं हो पाई ड्रेसगािजयाबाद। ठगी को रोकने के लिए विद्युत निगम ने मीटर रीडरों के ड्रेस लागू करने का फैसला लिया था, लेकिन यह योजना सिरेे नहीं चढ़ पाई।

विद्युत निगम के अफसरों को उम्मीद थी कि ड्रेस लागू हो जाने से लोगों को पता चल जाएगा कि यह निगम का कर्मचारी है। अगर वह बिल जमा करने के हामी भरे तो उसकी पहचान हो सके। दरअसल मीटर रीडरों को केवल चेक लेने का अधिकार है। कैश वह नहीं ले सकते हैं। इस बारे में विद्युत निगम के अिभयंता पीके माहेश्वरी का कहना है कि बिल बनाने वाली कंपिनयों से बात की जा रही है। ड्रेस लागू की जाएगी।

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