DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आकार से ज्यादा जरूरी है आबादी का नियोजन

कम से कम एक मामले में तो भारत चीन को पीछे छोड़ने जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की हाल ही जारी रिपोर्ट वल्र्ड पापुलेशन प्रास्पेक्ट्स में साफ कहा गया है कि 2028 तक भारत चीन को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। इसके बाद भी भारत की आबादी बढ़ती रहेगी जबकि चीन की आबादी में गिरावट आएगी। भारत में जनसंख्या के लगातार बढ़ने के साथ ही ताजा आंकड़े यह भी बताते हैं कि इस दशक में जनसंख्या के बढ़ने की दर में कमी आई है। परन्तु लिंग अनुपात के मामले में भारत अभी विश्व के कई विकासशील देशों से पिछड़ा हुआ है। भारत में बाल लिंगानुपात विश्व के 940 के मुकाबले 915 ही रह गया है। यह बताता है कि बालिकाओं की भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक अपराध अभी कम नहीं हुए हैं। हालांकि साक्षरता के आंकड़े पहले की तुलना में थोड़े बेहतर आए हैं। आज देश की लगभग तीन चौथाई आबादी साक्षर है। पिछले एक दशक में पुरुष साक्षरता में जहां मात्र सात फीसदी की वृद्धि हुई, वहीं स्त्री साक्षरता में इस बीच 23 फीसदी की वृद्धि हुई है।

हालांकि दूसरी ओर अनुसूचित जाति और जनजाति के बीच साक्षरता दर का कम होना अनेक सवाल खड़े करता है। एक सच यह भी है कि जहां साक्षरता दर कम हुई है, वहीं सकल प्रजनन दर में वृद्धि हुई है। इससे हम यह भी समझ सकते हैं कि समस्या का समाधान कहां पर है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या का स्वरूप भी खासा महत्वपूर्ण है। भारत में एक तिहाई आबादी 15 साल से कम उम्र वालों की है। दूसरी ओर युवाओं की संख्या 55 फीसदी से भी अधिक है। जबकि पश्चिम के देशों मसलन जापान, फ्रांस, जर्मनी व ब्रिटेन जैसे देशों में जनसंख्या के बढ़ने का स्तर अमूमन शून्य हो चुका है। भविष्य में वहां वृद्धों की संख्या बढ़ेगी और कार्यशील जनसंख्या कम होती जाएगी, जिससे उत्पादन घटेगा। जबकि भारत में इसका उल्टा होगा। हालांकि इसका हम कितना फायदा उठा पाएंगे यह अभी नहीं कहा जा सकता। यह इस पर निर्भर करेगा कि युवा संसाधन का इस्तेमाल कैसे होता है।

बाकी ब्रिक (ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन) देशों में फिलहाल जन्म दर और जनसंख्या वृद्धि दर लगातार घट रही है। भविष्य में केवल भारत देश ही ऐसा होगा जहां कि कार्यशील और ज्ञानाश्रित युवा जनसंख्या संपूर्ण विश्व में अपना परचम लहराएगी। इसलिए आज चीन की चिंता छोड़ हमें इस बात पर विचार अधिक करना चाहिए कि हमारी खुद की आबादी कुशल मानव संसाधन के रूप में कैसे विकसित हो। तभी हम अपने राष्ट्र की जनसंख्या में समाहित लोगों की भीड़ को सामाजिक-सांस्कृतिक संसाधन में रूपान्तरित करने में सफल हो सकेगें। अगर हम युवाओं के शिक्षण प्रशिक्षण की पुख्ता व्यवस्था नहीं कर सके तो यही आंकड़े उल्टा असर दिखा सकते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:आकार से ज्यादा जरूरी है आबादी का नियोजन