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रोचक होगा मुकाबला

एक साल पुरानी पार्टी दिल्ली में सरकार बना चुकी है। अब ‘आप’ के नेता लोकसभा की तैयारियों में जुट गए हैं। उधर, बीजेपी ताजा विधानसभा चुनावों में जीत की हैट्रिक लगा चुकी है। वह मोदी की लहर में केंद्र का सपना देख रही है। इसी दरमियां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आशा की है कि अगली सरकार संप्रग की बनेगी। यानी कांग्रेस की तरफ से राहुल पीएम पद के उम्मीदवार के रूप में सामने आ सकते हैं। प्रधानमंत्री ने मोदी को घातक बताकर आने वाले समय की आक्रामक राजनीति का परिचय दिया है। लेकिन कांग्रेस के ही एक बड़े नेता कहते हैं कि अगर आज पुरानी पार्टियों को इतिहास बनने से बचना है, तो उन्हें जनता के लिए कुछ करना होगा। भले ही सबकी निगाहों में लोकसभा हो, पर यह पहली बार दिख रहा है कि राजनीति के केंद्र में आम व्यक्ति है। देखना है कि देश की जनता किसे कुरसी पर बिठाती है।
मोहित कुमार ढुल, महिपालपुर, दिल्ली
aryanjat37@gmail.com


मनमोहन और मोदी

दिल्ली के मीडिया सेंटर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर जो निशाना साधा, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। अभी भाजपा के पक्ष में देश का माहौल है। नरेंद्र मोदी का कद दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। वहीं, अपने दो लगातार कार्यकाल में प्रधानमंत्री ने देश को निराश किया है। दूसरी तरफ, मोदी के विकास का गुजरात मॉडल देश-दुनिया में सराहा गया है। जनता इस आधार पर दोनों नेताओं की तुलना कर रही है। ऐसे में, अगर प्रधानमंत्रीजी मोदी के बारे में कुछ भ्रामक बातें करते हैं, तो यह गलत है। इससे उलटे उनकी प्रतिष्ठा ही खराब होगी। दरअसल, यह संवाददाता सम्मेलन तो बुलाया गया था राहुल गांधी को प्रोजेक्ट करने के लिए। नौ वर्षो तक चुपचाप रहने वाले प्रधानमंत्री का अचानक यह सब बोलना खलता है।
निमित जायसवाल, मुरादाबाद, उ.प्र.
nimitjaiswalmbd@gmail.com

भ्रष्टाचार से दूरी

दिल्ली विधानसभा में विश्वासमत के दौरान अरविंद केजरीवाल ने जो कहा, उसे सभी सदस्यों ने डेस्क थपथपा कर सराहा है। इससे जाहिर होता है कि सभी नेता जानते हैं कि राजनीति भ्रष्ट हो चुकी है। कुछ नेता इस भ्रष्टाचार की दलदल से निकलना भी चाहते हैं। लेकिन वह इससे निकल नहीं पा रहे हैं। इसलिए कुछ नेता आप के साथ हो लेना चाहते हैं। अलग-अलग राज्यों से खबर आ रही है कि वहां भी आप जैसी नीतियां ही लागू हो रही हैं। सादगी और कमखर्ची से देश का ही भला होगा। एक बात और। 1947 और 2014 के कैलेंडर एक जैसे हैं। इससे यही साबित होता है कि 1947 में देश अंग्रेज शासन से मुक्त हुआ था, तो 2014 में यह भ्रष्टाचार से मुक्त होगा।
शुभम अग्रवाल, बुलंदशहर, उ.प्र.
shubhamagarwalbsr1991@gmail.com

बड़बोले अरविंद

आजकल दिल्ली में एक नया नाम चल रहा है- आम आदमी। जिसे देखो, वही आम आदमी बनना चाहता है। लेकिन इस आम आदमी का मुखिया बने बैठे अरविंद केजरीवाल क्या वाकई आम हैं? सभी को याद है कि दिल्ली विधानसभा के चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि हम सबसे अलग हैं, न तो किसी से समर्थन लेंगे और न ही किसी को देंगे। लेकिन उन्होंने कांग्रेस से समर्थन ले लिया। इसके अलावा, मुख्यमंत्री बन जाने के बाद वह सरकारी आवास और गाड़ी का विरोध करने लगे हैं। उनका यह रवैया मेरी समझ से परे है। जनता ने उन्हें यह नहीं कहा है कि सरकारी चीजों का विरोध करो। हम तो बस इतना चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी समाज को भ्रष्टाचार मुक्त बनाए। जहां तक बात रही सरकारी चीजों की, तो मेरे खयाल से उन्हें वे सारी सरकारी सुविधाएं मिलनी चाहिए, जो शीला दीक्षित जी को मिलती थीं। अरविंद केजरीवाल जी आप बस ईमानदारी पूर्वक काम कीजिए, इसलिए जनता ने आपको वहां भेजा है, न कि अपने आपको कष्ट में डालने के लिए भेजा गया है। 
कबीर शरण, मानसरोवर पार्क, दिल्ली

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