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आईएसआई और दंगा पीड़ितों के बीच कोई संबंध नहीं

आईएसआई और दंगा पीड़ितों के बीच कोई संबंध नहीं

केन्द्र ने मंगलवार को इस बात से इंकार किया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और मुजफ्फरनगर दंगों के पीड़ित मुस्लिम युवकों के बीच किसी तरह का कोई संबंध है। केन्द्र ने हालांकि दिल्ली पुलिस के इस बयान का समर्थन किया कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तय्यबा के दो संदिग्ध व्यक्ति मुजफ्फरनगर में दो लोगों से मिले थे।

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस बात का कोई सबूत या खुफिया जानकारी नहीं है, जिससे पता चलता हो कि आईएसआई ने दंगा पीडितों से संपर्क किया। गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह भी 11 दिसंबर 2013 को संसद में एक सवाल के जवाब में इसी तरह का विचार व्यक्त कर चुके हैं।

आरपीएन ने राज्यसभा को सूचित किया था, खुफिया एजेंसी द्वारा दी गई सूचना के मुताबिक ऐसी कोई बात नहीं है, जिससे पता लगे कि आईएसआई, पाकिस्तान और मुजफ्फरनगर में हाल ही में हुए सांप्रदायिक दंगों से प्रभावित अल्पसंख्यक समुदाय के परिवार वालों से जुडे मुस्लिम युवकों के बीच कोई संबंध है।

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने हालांकि दिल्ली पुलिस के बयान का समर्थन किया है, जिसमें कहा गया है कि लश्कर के दो संदिग्ध मुजफ्फरनगर में दो लोगों से मिले थे लेकिन इस बात से इंकार किया कि जो दो लोगों से लश्कर के संदिग्ध मिले थे, वे दंगा पीड़ित हैं या उनका हिंसा से किसी तरह से कोई लेना देना है।

अधिकारी ने कहा कि यह बात सही है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में आईएसआई के कुछ सक्रिय लोग हैं लेकिन अब तक हमारे पास कोई ऐसा साक्ष्य या खुफिया जानकारी नहीं है, जिससे पता लगे कि आईएसआई ने मुजफ्फरनगर के दंगा पीडितों से संपर्क किया है।

ऐसी मीडिया खबरें हैं कि लश्कर के संदिग्ध आतंकवादियों ने अपने माड्यूल में भर्ती के लिए मुजफ्फरनगर के दंगा पीडितों से संपर्क किया। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के इस दावे कि आईएसआई ने सांप्रदायिक दंगों से प्रभावित असंतुष्ट पीडितों से संपर्क साधा है, के तीन महीने बाद आयी इन खबरों से काफी विवाद उठ खड़ा हुआ है।

 

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