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विवाद से बचने के लिए दिया इस्तीफा: जस्टिस गांगुली

विवाद से बचने के लिए दिया इस्तीफा: जस्टिस गांगुली

न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने अतिरिक्त विवाद खत्म करने के लिए पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है और जिस आधार पर केन्द्र ने राष्ट्रपति को उनके खिलाफ सिफारिश की है वह टिकने वाला नहीं है।

न्यायमूर्ति गांगुली ने राज्यपाल एमके नारायणन ने अपने त्यागपत्र में कहा कि वह यह जोर दे कर कहना चाहेंगे कि इलेक्ट्रानिक और प्रिंट दोनों मीडिया में उनके खिलाफ जो आरोप आ रहे हैं वे बेबुनियाद हैं और उनसे इनकार करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें हटाने के लिए माननीय राष्ट्रपति को जो कथित सिफारिशें की गई हैं वे अरक्षणीय और मिथ्या आधारित हैं। न्यायमूर्ति गांगुली ने अपना त्यागपत्र फोन पर पढ़ कर सुनाया।

न्यायमूर्ति गांगुली ने दिनांक 6 जनवरी के अपने पत्र में कहा कि आगे किसी और विवाद को खत्म करने के लिए और अपने परिवार के सदस्यों की शांति एवं खुशी सुनिश्चित करने के लिए और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि वह न्यायाधीश के उच्च पद पर आसीन थे और अभी डब्ल्यूबीएचआरसी के अध्यक्ष पद पर हैं और इस तुच्छ विचार के साथ कि उन्होंने दोनों की अपेक्षाएं पूरी की, उन्होंने तत्काल प्रभावसे आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है।

न्यायमूर्ति गांगुली ने कल यहां राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात की थी और उन्हें अपना त्यागपत्र सौंपा था। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि जब तक मैं गरिमा और सम्मान से काम नहीं कर सकता मुझे किसी पद से लगाव नहीं है और मैं समझता हूं कि मौजूदा हालात में यह संभव नहीं है।

न्यायमूर्ति गांगुली ने कहा कि इसलिए इस पत्र को मानवाधिकार रक्षा अधिनियम, 1993 की धारा 23 (1) के तहत नोटिस के रूप में लिया जाए। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि बहरहाल, मैं यह स्पष्ट करता हूं कि अपने किसी भी निंदक के प्रति कोई तल्खी नहीं हैं और मैं उन्हें जीवन में शुभकामनाएं देता हूं।

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