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मानचित्र की तैयारी भी है अहम पहलू

मानचित्र की तैयारी भी है अहम पहलू

स्कोरिंग विषय होने की वजह से सिविल सेवा परीक्षा व राज्य सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भूगोल पसंदीदा विषय बनता जा रहा है और आपकी तैयारी उतनी अच्छी होती है, जितनी 12वीं के लिए आपने की होती है।

भूगोल एक रोजगारपरक विषय है। इस क्षेत्र में आप मौसम विज्ञान व जीपीएस में डिप्लोमा प्राप्त कर अच्छे रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। स्कोरिंग विषय होने से सिविल सेवा परीक्षा व राज्य सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए भी यह पसंदीदा विषय बनता जा रहा है। इसका ज्ञान नगर नियोजन, जनसंख्या, शिक्षा, आर्थिक क्रियाओं व आर्थिक नियोजन के साथ देश की रक्षा व सामरिक रणनीति निर्धारित करने में उपयोगी सिद्ध होता है।

अति आधुनिक तकनीक जीपीएस, उपग्रह प्रणाली द्वारा सुदूर संवेदन, आधुनिक व विकसित संचार प्रणाली तथा मौसम की भविष्यवाणी में भी भूगोल का ज्ञान वरदान साबित होता है। 12वीं में अच्छे अंक पा लिये जाएं तो भविष्य की तैयारी में यह सहायक साबित होता है।

12वीं भूगोल की तैयारी के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकों का विस्तृत अध्ययन करें। मानव भूगोल की परिभाषा भूगोलवेत्ता के नाम सहित याद करें। निश्चयवाद (मानव का प्रकृतिकरण) व नव निश्चयवाद (रुको और चलो) की विशेषताओं व विचारकों का वर्णन तालिका बना कर याद करना सरल व प्रभावी होता है।

जनसंख्या संबंधी पाठों की सूचनाओं को तालिकाबद्ध कर लें। जैसे जनसंख्या वृद्धि दर लिंगानुपात, जनसंख्या घनत्व, नगरीय व ग्रामीण जनसंख्या, अर्जक व आश्रित, मेगा नगर आदि से संबंधित सबसे अधिक व सबसे कम वाली सूचनाओं को भारत व विश्व के संदर्भ में तालिकाबद्ध करने से दोनों पुस्तकों के पाठों की तैयारी सरलता से हो जाती है। जनसंख्या घनत्व/ वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन करते समय भारत व विश्व, दोनों के संदर्भ में उदाहरण याद करने से एक प्रश्न की तैयारी में ही दो प्रश्नों के उत्तर तैयार हो जाते हैं।

इसी प्रकार प्रवास व मानव विकास सूचकांक से संबंधित सूचनाएं भी दोनों पुस्तकों में होने से केवल अलग-अलग उदाहरण याद करने पर चार पाठों की तैयारी हो जाती है।

आंकड़े संबंधी जानकारियों को तालिकाबद्ध करके याद करना जरूरी है। बस्ती वाले अध्याय से बस्तियों के प्रकार जैसे आयताकार, रैखिक, वृत्ताकार, तारक आकार व टी आकार का अध्ययन चित्र सहित करें। ग्रामीण व शहरी गंदी बस्तियों की विशेषताओं का अध्ययन चित्र सहित करें। संहत बस्तियों व विरल बस्तियों का अध्ययन भी अनिवार्य है।

सबसे महत्वपूर्ण अध्याय परिवहन है, जिसमें नौगम्य नहरें व परद्वीपीय रेलमार्गों का अध्ययन अनिवार्य है। इनके अंतर्गत स्वेज नहर, पनामा नहर व राईन नदी की चौडमई आदि विशेषताओं को सूचीबद्घ करके याद करना चाहिए। तीनों पार महाद्वीपीय रेलमार्गो (पार साईबेरियन, पार केनेडियन व पार ऑस्ट्रेलियन) की विशेषताओं का अध्ययन भी तालिका बना कर याद करना सरल, रोचक व प्रभावी होगा।

‘कृषि’ अध्याय से भी विभिन्न प्रकार की कृषि की विशेषताओं का अध्ययन तालिका बना कर करें, जैसे जीवन निर्वाह कृषि, स्थानांतरी कृषि, गहन कृषि, विस्तृत कृषि व रोपण वाणिज्यिक कृषि आदि। इनके क्षेत्रों के नाम याद करने के साथ मानचित्र पर अंकित करने का अभ्यास भी करें। डेरी फार्मिंग व वाणिज्यिक पशुपालन की विशेषताओं का अध्ययन भी अनिवार्य व महत्वपूर्ण है। इनसे संबंधित क्षेत्रों के नाम याद करके मानचित्र पर अंकित करने का अभ्यास करें।

मानचित्र का प्रश्न 5 अंक का होता है, जिसमें एक भाग 2 अंक का होता है, जिसमें विश्व के मानचित्र पर चार स्थानों को उनकी विशेषता के साथ अंकित किया होता है। छात्र को उन स्थानों को उनकी विशेषताओं के आधार पर पहचान कर उनके नाम लिखने होते हैं। इसके लिए विश्व के प्रसिद्ध मेगा शहर, राजधानियों, विभिन्न कृषि क्षेत्रों, वायु पत्तन व जनसंख्या संबंधी स्थान आदि का अभ्यास करें।

दूसरा भाग 3 अंक का होता है, जिसमें भारत के रेखाचित्र पर दिए गए स्थान को नाम सहित अंकित करना होता है। इसके लिए भारत के प्रमुख पत्तन, वायु पत्तन, कृषि राज्यों के नाम, कोयला व लोहा क्षेत्र, सॉफ्टवेयर पार्क, नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र, लोहा इस्पात उद्योग, पूर्व-पश्चिम व उत्तर दक्षिण गलियारे के छोर बिंदु व स्वर्णिम चतुर्भुजों के प्रमुख शहरों का अभ्यास करें।

विस्तृत तैयारी के बाद समय निर्धरित करके आदर्श प्रश्नपत्रों व पूर्व प्रश्नपत्रों को हल करने का अभ्यास करें। इस बार से भूगोल विषय में वैल्यू बेस्ड प्रश्न भी पूछे जाएंगे। अत: विद्यार्थी इसकी भी अच्छी तरह तैयारी करें।

परीक्षा से दो-तीन दिन पूर्व निम्न प्रश्नों को जरूर दोहराएं

सूखा संभावी क्षेत्रों के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम (पंचवर्षीय योजना सहित)
पहाड़ी क्षेत्रों के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम। (पंचवर्षीय योजना सहित)
इन्दिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र का सतत् पोषणीय विकास।

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