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एकाग्रचित्त होने से बनेगी बात

एकाग्रचित्त होने से बनेगी बात

जैसे-जैसे परीक्षा की घड़ी नजदीक आती है, वैसे-वैसे छात्रों की बेचैनी भी बढ़ती है। बेचैनी का प्रतिकूल असर उनकी तैयारी पर पड़ता है। कई बार ऐसा देखा जाता है कि किसी टॉपिक का पूरा ब्योरा याद होते हुए भी व्यग्रता के कारण छात्रों को जरूरी प्वाइंट्स याद नहीं आते। ये दिक्कतें एकाग्र न हो पाने की वजह से होती हैं। 

स्पीड को लेकर न घबराएं
छात्रों का आत्मविश्वास गिरने का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता। कई चीजें उन्हें परेशान कर सकती हैं। कुछ की परेशानी यह होती है कि वे चाह कर भी विषय जल्दी खत्म नहीं कर पा रहे हैं। समय कम है और इस स्पीड से काम होना नहीं है। अब स्पीड नहीं बढ़ाएंगे तो फिर कब? लेकिन स्पीड बढ़ाने की हड़बड़ाहट में वे शेडय़ूल से हट कर काम करने लग जाते हैं। इससे पूरा टाइम टेबल और प्लानिंग गड़बड़ हो जाती है। स्पीड भी तभी हासिल हो सकती है, जब आप एक निश्चित प्लानिंग के तहत आगे बढ़ेंगे।

हौसले में ही ‘जान’ है
यदि मनोबल गिरा हुआ है तो आप किसी भी कीमत पर एकाग्रता नहीं बनाए रख सकते। खुद पर भरोसा रखें व लक्ष्य को टुकड़ों में बांट लें। जब एक पूरा हो जाए तो दूसरे की कोशिश में लगें। जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, एकाग्र होने लगेंगे। खुद छात्र यह महसूस करने लगेंगे कि एकाग्रता बढ़ने से पढ़ाई की गति में भी अंतर आया है।

किसी अन्य से तुलना न करें
मनोबल गिरने की एक वजह दूसरे साथियों से तुलना भी है। अक्सर छात्र अपने सामथ्र्य को दरकिनार कर साथियों की बातों में आ जाते हैं। उनकी बातें सुन कर उन्हें लगता है कि मेरी तो तैयारी ही नहीं हुई। नतीजा यह होता है कि उनकी बेचैनी बढ़ जाती है, इसलिए इस दरमियान औरों की बातें न सुनें। यदि कहीं समस्या आ रही है तो सीधे टीचर, पेरेंट्स अथवा सीनियर छात्रों की मदद लें।

कठिन विषयों का समय बढ़ाएं
इस दौर तक आते-आते छात्रों को यह पता चल गया होगा कि कौन सा विषय उन्हें परेशानी में डाल सकता है। इसे नजरअंदाज न करें। जो प्लानिंग की है, उसमें ऐसे विषय पर थोड़ा समय बढ़ा दें। फेरबदल में इतनी गुंजाइश कर सकते हैं कि जिस विषय की अच्छी तैयारी है, उसमें थोड़ी कटौती कर कठिन विषयों पर वह समय दें। इससे न सिर्फ विभिन्न विषयों की तैयारी के बीच संतुलन बना रहेगा, बल्कि मार्क्स के लिहाज से भी यह फायदेमंद है।

परेशानी कल पर न टालें
बेचैनी या विषय की तैयारी के चलते जो भी दिक्कतें आ रही हैं, उनका हल भी तत्काल होना चाहिए। कोई भी परेशानी कल तक के लिए न टालें। इससे आपके ऊपर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। यदि आप उसे दूर करने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं तो काउंसलर, मनोचिकित्सक से लेकर पेरेंट्स की मदद लेने में गुरेज न करें। तैयारी के दिनों में अधिकतर छात्र ‘भूलने की बीमारी’ के डर से ग्रसित होते हैं। उनका यह डर आधारहीन है, क्योंकि कम्प्लीट ब्लैकआउट की समस्या दस लाख लोगों में से केवल एक के ही साथ होती है।

सैंपल पेपर से मिलेगी मदद
प्रश्न पत्रों की कठिनता का स्तर हर साल करीब एक जैसा ही रहता है। उसकी संरचना सैंपल पेपरों से स्पष्ट हो जाती है, इसलिए छात्र जितना अधिक सैंपल पेपर हल करेंगे, उतना ही उनको पेपर का पैटर्न पता चलेगा। साथ ही उनका आत्मविश्वास भी बढेगा। सैंपल पेपर हल करने के दौरान छात्र यह भी देखें कि वे प्रश्नों के ऊपर कितना समय खर्च कर रहे हैं। समय का आंकलन करना भी जरूरी है। सीबीएसई सहित यूपी बोर्ड भी अपने मॉडल पेपर जारी करते हैं। उसकी सहायता भी छात्र ले सकते हैं।

साक्षात्कार/गीतांजलि कुमार
लक्ष्य को टुकड़ों में बांट लें

ज्यादातर उन छात्रों को बेचैनी होती है, जिनकी तैयारी अच्छी नहीं होती। अंतिम समय में शॉर्टकट तलाशते हैं। चूंकि अब दो महीने का समय शेष है, इसलिए छात्र सबसे पहले सिलेबस को पहचानें और वेटेज के हिसाब से उनको पढ़ना शुरू करें। छात्र अभी भी सचेत हो जाएं तो उनका कुछ नुकसान नहीं हो सकता। सर्वप्रथम वे अपने लिए रियलिस्टिक गोल तय करें और बड़े लक्ष्य की बजाय उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लें। पढ़ाई के दौरान जो भी प्वाइंट जरूरी लगे, उसे नोट करते जाएं। आगे चल कर ये काम आएंगे। मनोबल न गिरने दें। खुद पर भरोसा रखें। इससे आप बड़े से बड़ा लक्ष्य भी आसानी से हासिल कर सकेंगे।

व्यग्रता के लक्षण

नींद न आना
पढ़ाई के प्रति एकाग्र न होना
बार-बार विषय बदलना
भूख न लगना
परिजनों से दूर भागना
नकारात्मक सोच पालना
बात-बात में रिएक्ट करना
भूलने की शिकायत

क्या करें

आत्मविश्वास न गिरने दें
क्षमता का भरपूर उपयोग करें
रिजल्ट को लेकर बेफिक्र रहें
रीविजन करते रहें
लिखने का भी अभ्यास

क्या न करें

आधे-अधूरे अध्ययन से बचें
किसी की बातों में न आएं
कोई काम कल पर न टालें
दूसरों की तैयारी से न घबराएं
कम्युनिकेशन गैप न बनाएं

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