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कॉरपोरेट लॉयर की अच्छी है डिमांड

कॉरपोरेट लॉयर की अच्छी है डिमांड

मैं बीटेक (बायो टेक्नोलॉजी) के अंतिम वर्ष का छात्र हूं। मेरी टीचिंग और रिसर्च में काफी रुचि है। मैं सीएसआईआर-नेट परीक्षा में शामिल होना चाहता हूं, पर मुझे यह नहीं पता कि मैं इस परीक्षा में बैठने के योग्य हूं या नहीं। कृपया मेरा मार्गदर्शन कीजिए।
तुषार

स्टूडेंट्स को उनके करियर के शुरुआती दौर में आकर्षित करने के लिए सीएसआईआर ने अपनी एलिजिबिलिटी की सीमा पुनर्निर्धारित की है। इसमें अब निम्न डिग्री बीएससी (ऑनर्स), बीएस (4 साल), बीई, बीटेक, बी फार्मा, एमबीबीएस, इंटिग्रेटेड बीएस-एमएस, एमएससी आदि के स्टूडेंट्स भी शामिल हो सकते हैं। साथ में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स पीएचडी कर सकें, इसलिए सीएसआईआर-नेट ने छठा पेपर इंजीनियरिंग साइंस का शुरू किया है, जो सभी इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के लिए होता है। आप सीएसआईआर की वेबसाइट पर लॉगइन कर सैंपल पेपर और सिलेबस देख सकते हैं।

सामान्य अभ्यर्थी के लिए न्यूनतम अंक 55 प्रतिशत हैं, जबकि एससी, एसटी, फिजिकल हैंडिकैप के लिए न्यूनतम अंक 50 फीसदी हैं। अंतिम वर्ष के छात्र भी आगामी परीक्षा का हिस्सा बन सकते हैं।

यद्यपि साइंस और इंजीनियरिंग के स्टूडेंटस जेआरएफ के लिए तभी योग्य हैं, जब वे दो साल से पीएचडी में हों या इंटिग्रेटेड पीएचडी में एडमिशन ले चुके हों। यूजीसी के नये नियम के मुताबिक अब तीनों पेपर्स के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित हैं। पहले और दूसरे पेपर में न्यूनतम 40 प्रतिशत तथा तीसरे पेपर में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। ओबीसी कैटिगरी के लिए न्यूनतम अंकों में 5 प्रतिशत की छूट है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि नेट की मेरिट लिस्ट के टॉप 15 फीसदी उम्मीदवार (प्रत्येक सब्जेक्ट और कैटिगरी के आधार पर एग्रीगेट स्कोर) लेक्चररशिप के लिए क्वालिफाई और एलिजिबल हो जाते हैं। मेरिट लिस्ट के आधार पर नेट परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों के लिए जेआरएफ की एक अलग लिस्ट घोषित की जाती है।

मैं डॉं. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में अध्ययनरत हूं। क्या आप मुझे दिल्ली विश्वविद्यालय में एमए अंग्रेजी में एडमिशन प्रोसेस के बारे में जानकारी दे सकते हैं? क्या इसके लिए कोई प्रवेश परीक्षा होती है? क्या दिल्ली विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स को इस परीक्षा में प्राथमिकता मिलती है?
मनीष मलिक

दिल्ली विश्वविद्यालय अपना एमए अंग्रेजी कोर्स 12 कॉलेजों (मेन कैम्पस), 8 कॉलेज (साउथ कैम्पस) और नॉन कॉलेजिएट वुमंस एजुकेशन बोर्ड के माध्यम से कराता है। कुल 425 सीटों में से 50 प्रतिशत सीटें डायरेक्ट एंट्री के लिए आरक्षित होती हैं, जबकि शेष 50 फीसदी सीटों के लिए प्रवेश परीक्षा ली जाती है। डायरेक्ट एंट्री के तहत उन स्टूडेंट्स को एडमिशन मिलता है, जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (अंग्रेजी ऑनर्स) कोर्स 60 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण किया हो। हालांकि दिल्ली विश्वविद्यालय के बीए ऑनर्स में 60 प्रतिशत या उससे अधिक लाने वालों को भी इस कोर्स में एडमिशन मिल जाए, यह सुनिश्चित नहीं है।

डायरेक्ट एंट्री प्रकिया के तहत एक अलग मेरिट लिस्ट बनाई जाती है। इसके आधार पर उपलब्ध सीटों के आधार पर एडमिशन दिया जाता है, इसलिए डायरेक्ट एंट्री के लिए योग्य उम्मीदवारों को भी प्रवेश परीक्षा में बैठने का सुझाव दिया जाता है। प्रवेश परीक्षा के लिए वे सभी स्टूडेंट्स, जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से 45 फीसदी अंकों के साथ बीए (अंग्रेजी ऑनर्स) की परीक्षा उत्तीर्ण की हो या किसी अन्य विश्वविद्यालय से बीए की परीक्षा 50 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण की हो, योग्य होते हैं। हालांकि कुछ श्रेणी के स्टूडेंट्स के लिए इन अंकों में कुछ छूट दी जाती है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यदि किसी भी स्टूडेंट को हॉस्टल में एडमिशन लेना है तो प्रवेश परीक्षा में बैठना ही होता है, क्योंकि इसकी मेरिट लिस्ट के हिसाब से हॉस्टल में एडमिशन मिलता है। प्रवेश परीक्षा के तहत 90 मिनट का टेस्ट होता है, जिसके तीन हिस्से होते हैं। पहले में 60 अंकों के वैकल्पिक प्रश्न पूछे जाते हैं, दूसरे में 20 अंकों के सवाल किसी अनसीन प्रोज या वर्स पैसेज के आधार पर पूछे जाते हैं और तीसरे हिस्से में 20 अंकों का शार्ट एस्से लिखना होता है। आवेदन फॉर्म और इसके बारे में विस्तार से जानकारी पाने के लिए वेबसाइट www.englishdu.ac.in  पर क्लिक कर सकते हैं। 

बीबीए(ऑनर्स) करने के बाद मैं अब एलएलबी के अंतिम वर्ष का छात्र हूं। मेरी रुचि कॉरपोरेट में है। मेरी समस्या यह है कि मैं तय नहीं कर पा रहा कि मैं एलएलएम करूं या एमबीए?अगर एमबीए करना है तो भारत में करूं या विदेश से, यह भी बताइए। या फिर एलएलएम करूं या एलएलबी करने के बाद मुझे जॉब करना चाहिए। कृपया मार्गदर्शन करें।
सार्थक

अगर वास्तविकता की बात करूं तो कॉरपोरेट लॉयर्स अपने संस्थान या कंपनी को उनके कानूनी अधिकारों और पहलुओं के बारे में जानकारी देते हैं। बहुत ही कम केस वे कोर्ट में ले जाते हैं। कॉरपोरेट लॉयर्स अधिकतर मामलों में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनवा कर मसलों को आउट ऑफ कोर्ट ही निपटवाते हैं। अब उनके काम में भी भारी बदलाव आ गया है। अब उनका 70 फीसदी काम ट्रांजेक्शनल हो गया है, जबकि कानूनी काम सिर्फ तीस फीसदी ही रहा है। बदलते वैश्विक परिवेश में जिस तरह कंपनियों की सिक्योरिटीज और उनके ट्रांजेक्शन का काम बढ़ रहा है, ऐसे में कॉरपोरेट लॉयर्स की मांग में बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां सिर्फ बड़ी और इंटरनेशनल कंपनियां ही ऐसी डील्स करती थीं, वहीं अब तमाम छोटी कंपनियां भी ऐसी डील्स में शामिल हो गई हैं। ऐसे में उन्हें ऐसे कॉरपोरेट लॉयर्स की जरूरत रहती है, जो आईपीओ, जीडीआर, डय़ू डिलिजेंस, स्ट्रक्चर्ड फाइनेंस एंड बैंकिंग और इंटरनेशनल कानूनों के जानकार हों। कई कॉरपोरेट लॉ फर्म्स भी इस तरह की सर्विस देने के लिए कॉरपोरेट लायर्स हायर करती हैं। कॉरपोरेट लॉयर बनने के लिए आपको एलएलबी की डिग्री की आवश्यकता होती है। आपके केस में आपकी बीबीए की डिग्री आपके लिए अतिरिक्त योग्यता का काम करती है। आप अब जॉब सर्च शुरू कर दीजिए और किसी लॉ फर्म या किसी कंपनी के लीगल विभाग से जल्दी ही जुड़ने की कोशिश कीजिए।

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