DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आदर्श घोटाला: अशोक चव्हाण ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

आदर्श घोटाला: अशोक चव्हाण ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर दावा किया है कि आदर्श जांच आयोग की रिपोर्ट में उनसे न्याय नहीं किया गया है और यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
     
अशोक चव्हाण के नजदीकी सूत्रों ने बताया कि चव्हाण ने पत्र में आयोग के उनका पक्ष सुनने का जो भरोसा दिया था, उससे मुकरने पर आपत्ति जतायी है। सूत्रों के अनुसार अशोक चव्हाण ने मुख्यमंत्री और मुख्यसचिव जे एस सहारिया को लिखे पत्र में कहा, यह रिपोर्ट बहुत ही खराब है और मेरे साथ बहुत अन्याय हुआ है।

मुझे अभ्यारोपित करने से पहले आयोग ने मेरा पक्ष नहीं सुना। ऐसा इसके बावजूद हुआ कि उसके संज्ञान में यह बात लायी गई थी कि जब वह मेरे खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर रहा था, तो जांच आयोग की धारा आठ के तहत मेरा पक्ष सुना जाना चाहिए।
     
सूत्रों ने कहा, संबंधित लोगों को इस बात की जानकारी थी कि यदि किसी जांच से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव होने की संभावना है तो आयोग उसे अपना पक्ष रखने और अपने बचाव में सबूत रखने का उचित मौका देगा।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि सरकार पत्र पर ध्यान देगी। उन अधिकारियों के वर्ग ने भी अपना पक्ष रखा है जिन्हें जांच आयोग ने अभ्यारोपित किया है।
      
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जबकि यह नहीं कहा जा सकता कि अशोक चव्हाण ने आम नागरिकों को आदर्श सोसाइटी का सदस्य बनने की इजाजत देकर आदर्श कोआपरेटिव हाउजिंग सोसाइटी का पक्ष लिया या उसे उपकृत किया, लेकिन फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) का हिसाब लगाते समय 15 प्रतिशत मनोरंजन जमीन की कटौती नहीं करने की उनकी मंजूरी को निर्दोष कृत्य नहीं कहा जा सकता।
      
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हम उक्त निर्णय की वैधता या अन्यथा को लेकर चिंतित नहीं हैं। वह वैध या उचित हो सकता है, यद्यपि सदस्यता की मंजूरी और उनके नजदीकी रिश्तेदारों को फ्लैटों का आंवटन इस बात का संकेत है कि यह निर्णय उसके बदले किया गया।
      
अशोक चव्हाण के नजदीकी सूत्रों ने कहा कि आदर्श सोसाइटी के पास प्रस्तावित कैप्टेन प्रकाश पेठे मार्ग की चौड़ाई घटाकर 60.97 मीटर करने के राज्य सरकार के निर्णय का उनसे कोई लेना देना नहीं है। यह पूरी तरह से शहरी विकास विभाग से संबंधित मामला था और उसमें अशोक चव्हाण की कोई भूमिका नहीं थी जो कि उस समय राजस्व मंत्री थे।
      
महाराष्ट्र सरकार ने 20 दिसम्बर को आदर्श घोटाले पर आयोग की रिपोर्ट खारिज कर दी थी, जिसे राज्य विधानसभा में रखा गया था। यद्यपि राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने इस महीने आयोग की सिफारिशों को आंशिक रूप से लागू करने का फैसला किया। विपक्ष का आरोप है कि इसके तहत राजनेताओं का पक्ष लिया गया है तथा पूरी जिम्मेदारी नौकरशाहों पर डाल दी गई है।
      
उच्च न्यायालय के सेवानिवत्त न्यायाधीश जे ए पाटिल के नेतत्व वाले दो सदस्यीय आयोग ने चार पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक चव्हाण, दिवंगत विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे और शिवाजी राव एन पाटिल को वैध प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन करने के लिए अभ्यारोपित किया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:आदर्श घोटाला: अशोक चव्हाण ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र