DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कंकरीट के जंगलों में खो गयी जौनपुर की मूली

कभी पूरे देश में अपने स्वाद, वजन और लम्बाई के लिए जानी जाने वाली जौनपुर की मशहूर मूली बढ़ती आबादी और कम होती जा रही उपजाऊ जमीन के चलते अपना अस्तित्व खोती जा रही है। 

करीब तीस साल पहले तक जौनपुर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में जौनपुर की प्रसिद्ध नेवार मूली बडे पैमाने पर मिलती थी लेकिन बढ़ती जनसंख्या के कारण जिन क्षेत्रों में मूली पैदा होती थी वहां अब बडे़-बडे़ आलीशान मकान बन गये। 

जनवरी माह में जब लोग अपनी बहन बेटियों एवं फुआ के यहां मकर संक्रांति के अवसर पर खिचडी भेजते थे तो उसमें लाई, चूरा, गुड़, गट्टा, आलू, गोभी के साथ दो चार जौनपुरी मूली अवश्य भेजते थे लेकिन नेवार मूली अपना अस्तित्व खोती जा रही है और उसकी पैदावार बहुत कम रह गयी है। 

जौनपुर शहर के नवाब साहब का अहाता, चाचकपुर, चकप्यारअली, बलुआ घाट, रास्मंडल, बल्लोचटोला, लखनपुर, चौकिया धाम आदि स्थानों पर जौनपुरी मूली पैदा होती थी। यहां की मूली तीन से चार फीट लम्बी, मोटी और दस से बारह किलो तक वजनी की होती थी।

जौनपुर शहर और उसके आस पास के उन तमाम मुहल्लों में जहां अब आवासीय भवन बन गये हैं उस भूमि पर नेवार मूली उतनी नहीं पैदा हो पा रही है जितना की उसकी पहले पैदावार होती थी। अब जौनपुरी मूली दो से ढाई फुट लम्बी तथा तीन से पांच किलो तक वजनी ही हो पा रही है। मूली के आकार और उसके स्वाद पर बिगड़ते पर्यावरण और बदलते जलवायु का भी असर पडा है।

अब लोग जौनपुरी मूली को केवल इतिहास के पन्नों में ही पढ़ और देख रहे हैं। असलियत में अब वह मूली कहीं पर भी नहीं पैदा हो पा रही है। 

जौनपुर की मूली को संरक्षित करने के लिए चाचकपुर मुहल्ले के कुछ किसानों ने प्रयास किया मगर उन्हें उतनी सफलता नहीं मिली। किसानों का कहना है कि यदि सरकार जौनपुरी मूली के विकास के बारे में कोई ठोस कदम उठाये तो विलुप्त हो रही जौनपुरी मूली को बचाया जा सकता है। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कंकरीट के जंगलों में खो गयी जौनपुर की मूली