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अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच में चल रहा ‘खेल’

लखनऊ। रजनीश रस्तोगी। अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच के नाम पर जिलों में तैनात स्वास्थ्य विभाग के अफसर ‘खेल’ कर रहे हैं। मानकों से खिलवाड़ कर धड़ल्ले से अल्ट्रासाउंड मशीनें चल रही हैं। अफसर सेंटर में जांच कर खानापूरी कर रहे हैं।

वहीं जब परिवार कल्याण महानिदेशालय की ओर से गठित स्टेट इनफॉरमेशन मॉनेटरिंग कमेटी (एसआईएमसी) ने मानकों की तहकीकात शुरू की तो पोल खुल गई। खामियां इस कदर मिलीं की सेंटर को सील करना पड़ा।

यह सनसनीखेज खुलासा परिवार कल्याण महानिदेशालय के अफसरों की रिपोर्ट में हुआ है। प्रदेश में करीब 42 सौ अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं। इनमें 4636 अल्ट्रासाउंड मशीनों का संचालन हो रहा है। इन सेंटरों की जांच का जिम्मा सीएमओ पर है। ज्यादातर जिलों में केंद्र संचालक पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मिलीभगत से उनका धंधा तेजी से पनप रहा है। जिलास्तर की टीम को अल्ट्रासाउंड केंद्रों में खामियां नहीं दिखाई देती। वहीं एसआईएमसी की टीम ने जिलों में छापेमारी की कार्रवाई शुरू की तो जिलास्तर के अफसर और अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालकों की मिलीभगत का खुलासा हुआ।

परिवार कल्याण महानिदेशालय में निदेशक डॉ. मीनू सागर के मुताबिक, जिलों में अल्ट्रासाउंड केंद्रों को मानकों पर कसने में अफसर का रवैया काफी सुस्त है। मनमानी पर काबू पाने के लिए एसआईएमसी समय-समय पर छापेमारी कर रही है।

मानकों के खिलाफ चल रहे सेंटरों के खिलाफ पीसीपीएनडीटी एक्ट के अनुसार कार्रवाही होगी। उन्होंने बताया कि सील सेंटरों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है।

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