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जनता से तमीज से पेश आए पुलिस : कोर्ट

लखनऊ विधि संवाददाता। नागरिकों के सम्मान और आम आदमी की मर्यादा की सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। अदालत ने केन्द्र और राज्य सरकार से पूछा है कि उनके मुलाजिमीन खासतौर से पुलिस वाले नागरिकों के साथ सम्मान पूर्ण लहजे में बात करना कब सीखेंगे। अदालत ने दोनों सरकारों से यह भी जानना चाहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने क्या कदम उठाए हैं।

दोनों सरकारों को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तजा व न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय की खण्डपीठ ने उक्त आदेश एक जनहित याचिका पर स्वयं संज्ञान लेकर जारी किए। याचिका नैतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्र भूषण पाण्डेय ने दायर की थी लेकिन पीठ ने याचिका को नए शीर्षक ‘इन री-नागरिकों के सम्मान के प्रति’ के नाम से दर्ज किया है व याचिकाकर्ता के रूप में नैतिक पार्टी के नाम को हटा दिया है।

अदालत ने अगली सुनवायी में न्यायालय की सहायता के लिए वरिष्ठ अधविक्ता आईबी सिंह को नियुक्त किया है। एडवोकेट सीबी पाण्डेय की दलील थी कि नैतिक पार्टी ने नागरिकों की मर्यादा को लेकर छह माह पूर्व एक सर्वे कराया था जिसमें सामने आया था कि सरकार के अधिकारी-कर्मचारी नागरिकों से सम्मानपूर्ण ढंग से न तो बर्ताव करते हैं और न बातचीत। खासतौर से पुलिस लोगों के साथ बेहद अभद्र और क्रूर बर्ताव करती है। स्थिति यह है कि कोई भी सम्मानीय नागरिक अपने साथ घटित अपराध की सूचना थाने में दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है।

एडवोकेट पाण्डेय की दलील थी कि नैतिक पार्टी ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचवि को कई प्रत्यावेदन भेजे, किन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई।

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