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सीएम कार्यालय का फरमान, तहसीलदार झा का करें ट्रांसफर

बरेली। वरिष्ठ संवाददाता। पेट्रोल पंप के लिए आवंटित गैर कृषि भूमि को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दाखिल खारिज निरस्त करने के मामले में तहसीलदार सदर गिरीश झा जांच के घेरे में आ गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से उनके ट्रांसफर का आदेश जारी किया गया है।

आदेश की कॉपी कमशिनर और डीएम को भेज दी गई है। वहीं डीएम अभिषेक प्रकाश ने आरोपों की जांच एडीएम एफआर अरुण कुमार को सौंपी है। किला में फूलबाग की डा. अनुपमा राघव ने मिनी बाइपास पर 3600 गज जमीन बाबूराम और मान खां से खरीदी थी। बाइपास निर्माण के लिए सरकार ने उसमें से 1420 गज जमीन का अधिग्रहण कर लिया। इसके बदले 13 लाख रुपये अनुपमा राघव को दे दिए गए। इसी दौरान 2011 में बची 1360 गज जमीन पर हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कंपनी का पेट्रोल पंप आवंटित किया गया।

तत्कालीन तहसीलदार भानु प्रताप शुक्ल ने जमीन को लेकर कुछ आपत्ति दर्ज की। 143 के तहत जमीन को अकृषक घोषित किया गया था। बाद में मामले में 13-8 की कार्रवाई की गई, जिसमें जमीन को यूपी जेडएएलआर एक्ट घोषित कर दिया गया (इस एक्ट के तहत राजस्व अधिकारियों से सारे अधिकार छिन गए, इसमें निर्णय देने का अधिकार सिविल जज को है)। आरोप है कि तहसीलदार सदर गिरीश कुमार झा ने पद का दुरुपयोग करते हुए 26 अगस्त 2012 में दाखिल खारिज निरस्त कर दिया।

इस मामले में बाद में एडिशनल कमिश्नर ने उसमें स्टे कर दिया। इस पूरे मामले की शिकायत अनुपमा राघव ने जिला सहकारी संघ के अध्यक्ष और वरिष्ठ सपा नेता महेश पाण्डेय के माध्यम से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से की। मुख्यमंत्री को ओएसडी जगजीवन प्रसाद ने डीएम को पत्र भेजकर तहसीलदार सदर को जिले में कहीं ऐसी जगह ट्रांसफर करने का आदेश दिया है, जहां उनका जनता से बास्ता न हो।

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