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मगही-भोजपुरी के विरोध का निर्णय

रांची। झारखंड सरना मसना विकास समिति के पदाधिकारियों की बैठक सोमवार को करमटोली में हुई। इसकी अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष माधो उरांव ने की। इसमें मगही-भोजपुरी में नौकरी देने के विरोध का निर्णय लिया गया। मगही और भोजपुरी झारखंड की स्थानीय भाषा नहीं है।

इसलिए मगही-भोजपुरी भाषा के लोगों के लिए झारखंड की नौकरी में कोई प्रावधान नहीं होना चाहिए। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि स्थानीय भाषा में ही नौकरी एवं अन्य विभाग का लाभ मिलना चाहिए। बैठक में सुकरा उरांव, सुरेश तिग्गा, करमा होरो, राधागोविंद सिंह मुंडा, चरण बेसरा, अनंतराम उरांव, नंदा उरांव, नगिया टोप्पो, डॉ शांति खलखो, बुधराम उरांव व अन्य उपस्थित थे।

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