DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

खोजा जा रहा विधायक निधि खर्च करने का तरीका

जमशेदपुर वरीय संवाददाता। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में बस 11 सप्ताह बचे हैं और जिले के 6 विधायकों के खाते में बचे करोड़ो रुपये खर्च करने का पुराना तरीका परेशानी का कारण बन गया है। इसलिए विधायक निधि और मुख्यमंत्री विकास निधि की राशि खर्च करने का नया तरीका ढूंढ़ा जा रहा है। ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचवि अरुण का पत्र जिला प्रशासन को मिलने के बाद इसका नियमसंगत रास्ता निकालने पर मंथन चल रहा है।

संभावना यह बन रही है कि अब टेंडर कर काम कराया जाएगा। विधायक निधि में टेंडर की परंपरा नहीं है। विधायक अपनी पसंद की सरकारी एजेंसी चुनकर काम कराते हैं, लेकिन अब काम के विरुद्ध भुगतान या फिर टेंडर के माध्यम से ही काम का रास्ता दिख रहा है। उपायुक्त डॉ. अमिताभ कौशल ने इस मामले में जमशेदपुर के ट्रेजरी ऑफसिरे से भी इस मसले पर बात की है। उन्होंने अग्रिम राशि निकालने में नियमों की बाध्यता का हवाला दिया है।

हड़बड़ी का कारण आचार संहिता का डरहड़बड़ी का एक कारण यह है कि फरवरी के अंत तक लोकसभा चुनाव की घोषणा संभावित है। यदि चुनाव की घोषणा हो गई तो आचार संहिता लग जाएगी और फिर कोई नई योजना शुरू नहीं की जा सकेगी। एसी-डीसी बिल की पेंचवित्त विभाग की नियमावली के कारण विधायक निधि की राशि खर्च करने में समस्या हो रही है। पहले बेरोक-टोक अग्रिम राशि (एडवांस कंटिजेंट बिल) की निकासी होती थी। तब पिछला काम पूरा किए बिना दूसरी अग्रिम निकाली जा सकती थी।

परंतु अब वित्त विभाग ने नियम बना दिया है कि एक बार निकाले गए एडवांस (एडवांस कंटिजेंट बिल या एसी बिल) को खर्च करने का पूरा ब्योरा जिसे विभागीय शब्दावली में (डिटेल कंटिजेंट बिल या डीसी बिल) उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, दूसरा एडवांस नहीं निकाला जा सकता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:खोजा जा रहा विधायक निधि खर्च करने का तरीका