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अधूरी योजनाओं को कागज पर पूरी दिखा पैसों की निकासी

मुजफ्फरपुर। प्रमुख संवाददाता। गायघाट पंचायत समिति से कार्यान्वित योजनाओं में भारी अनियमितता उजागर हुई है। बीआरजीएफ, 13वें वित्त आयोग व चतुर्थ राज्य वित्त आयोग के तहत जिन योजनाओं को पूर्ण बताते हुए पैसे की निकासी कर ली गई, उनमें से अधिकांश योजनाएं अब तक आधी-अधूरी हैं। कई योजनाओं का तो जमीन पर अता-पता भी नहीं है।

आरटीआई कार्यकर्ताओं की टीम ने योजना के कार्य स्थल का निरीक्षण करने के बाद चौंकाने वाली गड़बडिम्यों का खुलासा किया है। इस टीम में बलहा का अमित कुमार मंडल, कमरथू का गौतम कुमार सिंह और जारंग डीह का हीरालाल साह शामिल थे।

तीनों आरटीआई कार्यकर्ताओं ने सोमवार को तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त को ज्ञापन देकर गायघाट पंचायत समिति द्वारा वित्तीय वर्ष 2011-12 और 2012-13 में कार्यान्वित योजनाओं की विस्तृत तकनीकी जांच कराने की मांग की है। सर्वेक्षण में गायघाट पंचायत समिति द्वारा बीआरजीएफ के तहत वर्ष 2011-12 में कार्यान्वित तीनों पीसीसी सड़कें अधूरी पायी गईं, जबकि कागज पर पूरे पैसे का उठाव दिख रहा है।

पहली एवं तीसरी योजना का अभिकर्ता पंचायत सचवि विपिन कुमार और दूसरी योजना का अभिकर्ता पंचायत सचवि सुदिष्ट राय है। धुबौली में धूपन राय के घर से सत्यनारायण राय के घर तक सड़क आधी-अधूरी है। टीम ने एक ही वित्तीय वर्ष (2012-13) में स्वीकृत 17 में से 8 योजनाओं का अभिकर्ता पंचायत सचवि भरत ठाकुर को तथा 7 योजनाओं का अभिकर्ता पंचायत सचवि विपिन कुमार को बनाए जाने पर सवाल खड़ा किया है। टीम ने खुलासा किया है कि वर्ष 2012-13 में कुल 13 योजनाओं (संख्या-3 से 15तक) में जमीन पर एक रुपया का भी काम नहीं कराया गया है।

बखरी (योजना 14/12ञ13) में 57 हजार रुपये की निकासी तो हुई, परन्तु कार्य आरंभ नहीं हुआ। कुछ योजनाओं में काम शुरू कराने के बाद बंद कर दिया गया। सभी योजनाओं में पैसे का उठाव कर लिया गया है। टीम ने योजनाओं में बीडीओ की मिलीभगत से लाखों रुपये की अवैध निकासी का आरोप लगाया है। 125 चापाकलों का अता-पता नहीं:चतुर्थ राज्य वित्त आयोग के तहत पंचायत समिति ने 192 चापाकल लगाने का लक्ष्य तय किया। टीम को 40 चापाकल में घटिया काम दिखा।

125 चापाकलों का अता-पता नहीं मिला। वर्ष 2012-13 में प्रखंड पंचायत समिति ने छह आंगनबाड़ी केन्द्रों के निर्माण में प्राक्कलन की अनदेखी की। बखरी में 4.99 लाख की योजना में से 4.75 लाख खर्च के बावजूद लिंटर कार्य हुआ। मोहम्मदपुर सुरा में 2.07 लाख खर्च के बावजूद लिंटर तक कार्य नहीं हुआ। बदेया सुस्ता में 1.07 लाख खर्च के बावजूद कार्य आरंभ नहीं हो सका। टीम ने पाया है कि घटिया ईंट का प्रयोग किया गया और प्राक्कलन के अनुसार छड़ का इस्तेमाल नहीं किया गया।

आरटीआई के तहत जानकारी देने में आनाकानी: आरटीआई के तहत बार-बार आवेदन देने पर भी पंचायत समिति द्वारा कार्यान्वित योजनाओं की जानकारी देने में बीडीओ आनाकानी करते रहे। आरटीआई कार्यकर्ता अमित कुमार मंडल ने पिछले साल 12 फरवरी और 25 फरवरी को लोक सूचना पदाधिकारी सह बीडीओ से वर्ष 2011-12 में बीआरजीएफ तथा अन्य मदों से कार्यान्वित योजनाओं के प्रस्ताव, प्राक्कलन, मापी पुस्तिका एवं सामग्री की खरीदारी से संबंधित रसीदों की छाया प्रति मांगी। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर 26 अप्रैल को प्रथम अपीलीय प्राधिकार सह डीडीसी से शिकायत की गई।

डीडीसी ने 30 अप्रैल को पत्र जारी कर बीडीओ को मांगी गई सूचनाएं शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। कई महीने बाद बीडीओ ने अलग-अलग तिथियों को मांगी कई सूचनाएं उपलब्ध करा दीं।

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