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नारी हक में हल्ला बोल में महिलाओं से बात

आगरा। नारी को सशक्त बनने की जरूरत है। अपनी प्रतिभा को पहचाने की जरूरत है, जिससे किसी भी मुश्किल घड़ी का मजबूती से सामना कर सके। साथ ही समाज को भी महिला के प्रति अपनी सोच को बदलना होगा। डॉ रिनी गुप्ता, समाज सेविका। महिलाओं को सही मायने में न्याय दिलाने के लिए महिला एडवोकेट्स की लीगल सेल का निर्माण किया जाए, ताकि सामाजिक संगठन किसी भी पीड़िता को पूरा इंसाफ दिला सकें। दीप्ती दयाल, इनरव्हील क्लब ऑफ आगरा मेन।

सबसे पहले ‘हिन्दुस्तान’ को धन्यवाद देना चाहती हूं। मेरी नजर में हर महिला को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है। साथ ही स्कूल कालेजों में भी शिक्षिकाएं अपनी छात्राओं को यही सीख दें, जिससे हर युवती मजबूत बने। डॉ मधुरिमा शर्मा, प्रवक्ता, सेंट जोंस कॉलेज। प्रशासन को महिलाओं की सुरक्षा के लिए और कड़े प्रबंध करने चाहिए। हर महिला को खुद ही अपने को इतना मजबूत बनाने की आवश्यकता है कि कोई उसकी ओर आंख उठाकर भी ना देख सके।

ज्योति खंडेलवाल, कथक शिक्षिका, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान। प्रशासन को महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम करने चाहिए। कई बार सड़क पर अकेली चलती युवती छेड़छाड़ होने पर भी मदद ना मिलने की वजह से चुपचाप रह जाती है। इसी डर को मिटाने के लिए अफसरों को प्रयास करने चाहिए। निशा शर्मा, वाइस प्रिंसीपल शेमफोर्ड स्कूल। आए दिन महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए आत्मसुरक्षा को प्रशिक्षण लेना अति आवश्यक है। स्कूल- कालेज जाने वाली युवतियां अपनी सुरक्षा के लिए पर्स में चिली स्प्रे जरूर रखे।

जिससे राह चलते मनचलों को सबक सिखाया जा सके। नूतन त्रिवेदी, समाज सेविका। परिवार बच्चों को अच्छे संस्कार दें। बेटे- बेटी में समान भाव रखें। बच्चों को मर्यादा में रहने की भी सीख दें। उनके पहनावे व हावभाव का पूरा ख्याल रखें, ताकि बच्चा गलत सोहबत में ना पड़ जाए। ऊषा सिंह ट्रेनर। महिला अपराध बढ़ने की एक वजह अशिक्षा भी है। हर बेटी को पढ़ने के लिए जागरूक किया जाए, ताकि समय आने पर अपनी सुरक्षा बिना किसी के सहारे कर सकें।

डॉ ह्देश चौधरी, समाज सेविका आराधना संस्था। जिस प्रकार मीडिया ने महिलाओं को उनके हक के प्रति अपने अभियानों से जागरूक किया है। उससे काफी हद तक महिलाओं में आत्मवशि्वास बढ़ा है। आज युवतियां अपने हक की लड़ाई के लिए आगे आ रही हैं, जो नारी हक की सफलता का प्रतीक है। पवन आगरी, कवि एवं अध्यक्ष आराधना संस्था। महिलाएं खुद को सशक्त बनाएं। महिलाओं के हित में बनाए कानूनों का पालन भी होना चाहिए। लेकिन ये नहीं होता। इन हालातों में महिला को न्याय कैसे मिलेगा। इस पर भी मंथन होना चाहिए। राजपाल, पार्षद।

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