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21,000 आवंटियों को राहत देने पर फैसला कल

ग्रेटर नोएडा। हमारे संवाददाता। बुधवार को होने वाली यमुना प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की उम्मीद है। खासकर आवासीय सेक्टरों के 21,000 आवंटियों को थोड़ी राहत मिल सकती है। मिक्स लैंड यूज की स्कीम को बोर्ड में मोहर लगाए जाने की उम्मीद है। प्राधिकरण की वित्तीय समीक्षा भी की जाएगी और आवासीय सेक्टरों के आंतरिक विकास पर खर्च किए जाने वाले 600 करोड़ रुपये के बजट को लेकर भी निर्णय लिए जा सकते हैं।

यह पहला मौका है जब यमुना प्राधिकरण की बोर्ड बैठक यमुना प्राधिकरण के कार्यालय में होने जा रही है। अभी तक यमुना की बैठक नोएडा अथवा ग्रेटर नोएडा में हुआ करती थी। प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में आवासीय सेक्टर-18 व 20 के 21,000 आवंटियों का थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि प्राधिकरण इन आवंटियों को मकान बनाने में कुछ अतिरिक्त समय की छूट दे सकते हैं। यह स्कीम प्राधिकरण ने वर्ष 2009 में घोषित की थी।

आवंटियों को नवंबर 2014 में प्लॉट पर कब्जा दिए जाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन किसानों के विरोध के चलते अभी तक आवंटियों को प्लॉट पर कब्जा नहीं मिल सका है। एक ओर आवंटी कब्जा न मिलने से निराश हैं और दूसरी ओर प्राधिकरण उनसे लगातार किस्तें वसूल रहा है। दर्जनों की संख्या में आवंटी लगतार प्राधिकरण अफसरों से मुलाकात कर किस्तें जमा कराने और उन पर लगाए जाने वाले ब्याज में छूट की मांग करते रहते हैं। बोर्ड बैठक में प्राधिकरण किस्तों की अदायगी में छूट न देकर आवंटियों को कब्जा प्राप्त करने के लिए प्लॉट पर मकान बनाने के लिए निर्धारित समय में छूट दे सकता है।

हाईकोर्ट के स्थग्न आदेशों से प्रभावित डिफाल्टर हुए ग्रुप हाउसिंग के प्रोजेक्टों के बारे में भी फैसला लिया जा सकता है। प्राधिकरण अफसरों के लिए बड़ी परेशानी की वजह सेक्टर-18 व 20 में आंतरिक विकास कार्य कराना बन रहा है जमीन पर हाई कोर्ट के स्थग्नादेश और किसानों के अडिम्यल रवैये के चलते प्राधिकरण यहां अभी तक सड़क, सीवर बिजली, पानी आदि के विकास कार्य नहीं करा सका है। इन सेक्टरों में करीब 600 करोड़ रुपये के विकास कार्यो के टेंडर जारी भी किए जा चुके हैं, लेकिन हालात ठीक न होने की वजह से कंपनियां रुचि नहीं दिखा रही हैं।

बोर्ड बैठक में प्राधिकरण की मिक्सलैंड यूज स्कीम को भी हरी झंडी दिए जाने की उम्मीद है। इस स्कीम में ऐसे प्लॉटों को शामिल किया गया है, जिनका इस्तेमाल आवंटी आवासीय, औद्योगिक, संस्थागत और कॉमर्शियल गतिविधियों क लिए कर सकते हैं। बोर्ड में प्राधिकरण की वित्तीय प्रगति की समीक्षा भी होगी। प्राधिकरण पर नोएडा ग्रेटर नोएडा की तरह किसानों को 64 प्रतिशत दरें बढ़ाकर मुआवजा दिए जाने का दबाव है। शासन स्तर पर किसानों के पक्ष में निर्णय लिया गया तो प्राधिकरण पर करीब 6,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ जाएगा।

ऐसे में हालात से कैसे निपटा जाए इस पर भी बोर्ड में चर्चा होने की उम्मीद है।

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