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भाजपा ने कहा-अलविदा अटल

राजनीति के पुरोधा अटल बिहारी वाजपेयी की सक्रिय राजनीति से औपचारिक विदायी हो गयी । राजनीतिक क्षितिज पर 50 सालतक अपने बहुआयामी व्यक्ितत्व की आभा बिखेरनेवाले इस शख्स को लोग अब संसद या चुनावी सभाओं में बोलते नहीं देख-सुन पायेंगे। अटलजी और भाजपा ने एक दूसर को शायद राम-राम कर दिया है।ड्ढr पार्टी ने आगामी लोस चुनाव के लिए उम्मीदवारों की जो पहली सूची जारी की, उसमें भी अटलजी का नाम का न होना, इसी का संकेत है। भाजपा के अंदर यह चर्चा है कि अटलजी के चुनाव लड़ने से मना करने के बाद ही पार्टी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की। सूची में आडवाणी हैं, अटलजी का नाम गायब। लेकिन लखनऊ से उनकी जगह कौन उम्मीदवार होगा। अटलजी आधी सदी तक जनसंघ और भाजपा के न सिर्फ मूर्धन्य राजनेता रहे, बल्कि अपने दल के पर्याय बनकर रहे। उनके बगैर दल के अंदर नेतृत्व की कभी कल्पना ही नहीं की गयी। वाजपेयी जी जनसंघ या भाजपा के अध्यक्ष रहे हों या नहीं, वह अध्यक्ष जसी संस्था से भी दल में सदैव ऊपर रहे। सक्रिय राजनीति से बाहर आने के बावजूद अटल दल के मार्ग दशक बने रहेंगे, एसा भाजपा के शीर्ष नेताओं का कहना-मानना है। दल के नेता उनसे आजीवन मार्गदर्शन और सुझाव लेते रहेंगे। भाजपा के अंदर आज भी अटल-आडवाणी के बाद ही किसी अन्य नेता का नाम सामने आता है। चुनावी पोस्टर हो या सभा का बैनर, अटलजी का मुस्कुराता चेहरा को देख उनके दल के कार्यकर्ता अंदर से कितना ऊरान्वित होते रहे हैं, यह कोई बतानेवाली बात नहीं है। फिर चुनावी सभाओं में अटलजी को सुनना सिर्फ उनके समर्थकों को ही नहीं, गैरराजनीतिक लोगों को विशिष्ट अनुभूति प्रदान करता रहा है। किसी बड़े राजनेता के जीते जी विदाई की यह बेला शायद आ चुकी है।ड्ढr रांची में आज भाजपा प्रदेश कार्यसमिति कीड्ढr बैठक चुनावी रणनीति पर होगी चर्चा पेज 7 परअटलजी का चुनावी सफर: 1में पहली बार बलरामपुर (यूपी) से सांसद बने। पांचवीं, छठी, 7वीं, 10वीं, 11वीं, 12वीं, 13वीं लोस के सदस्य रहे। यूपी, एमपी, गुजरात और दिल्ली से लोकसभा पहुंचे। 1से लगातार लखनऊ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व।ड्ढr प्रमुख पदों पर रहे : प्रधानमंत्री (16-31 मई 1अक्टूबर 1से 13 मई 2004)।ड्ढr लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष : (1।ड्ढr विदेश मंत्री (1।ड्ढr पुरस्कार : पद्म विभूषण, कानपुर विवि से डॉक्टरट की मानद उपाधि (1। लोकमान्य तिलक सम्मान (1। सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार (1।ड्ढr प्रमुख नेताओं के उद्गारड्ढr राजनीति के शिखर पुरुष बनेंगे अटल: नेहरूड्ढr महान देशभक्त हैं अटल : इंदिरा गांधीड्ढr राजनीति के भीष्म पितामह : मनमोहन सिंहड्ढr आज के श्यामा प्रसाद अटल: आडवाणीड्ढr अटल राजनीति के अपवाद: भीमसेन जोशी

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