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अरब क्रांति से ड्रैगन ने सीखे चार सबक

अरब क्रांति से ड्रैगन ने सीखे चार सबक

तीन साल पहले शुरू हुई अरब क्रांति से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने निश्चित रूप से सबक लिया है। सीसीपी दुनियाभर की सियासी हलचलों का अध्ययन करती है। इनसे हासिल नतीजों का इस्तेमाल वह अपने देश में स्थिरता बनाए रखने में करती है।

1. गतिविधियां बढ़ाना
अरब क्रांति शुरू होते ही इसके नतीजों को भांपकर कई देशों की सरकारों ने अपने यहां सुधारात्मक कदम उठाए। मिस्‍त्र में हलचल शुरू होते ही सऊदी अरब ने सब्सिडी बढ़ाकर देश में संभावित विरोध को नियंत्रित करने की कोशिश की। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने बल प्रयोग से बहरीन में विरोध को दबाया और व्यवस्था बहाल होने के बाद सरकार ने कुछ रियायतों की घोषणा की। मोरक्को और जॉर्डन की सरकारों ने भी कुछ छूट और सुधार लागू किए, जिनमें अलोकप्रिय नेताओं को हटाना भी शामिल था।

2. मीडिया को काबू करना
अरब क्रांति को फैलाने में सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई। प्रदर्शनकारियों ने अपने प्रदर्शन के आयोजनों में और अपने संदेशों के प्रसार के लिए सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल किया। जाहिर है कि सरकारें सोशल मीडिया साइट पर पाबंदी लगाकर विरोध को नियंत्रित कर सकती हैं। इस सबक को सीसीपी से ज्यादा बेहतर किसी ने नहीं आजमाया। एक अध्ययन के मुताबिक चीनी लोगों के विचारों को चुनिंदा तरीके से सेंसर करने में चीन की सरकार के कार्यक्रम का आकार और जटिलता विश्व इतिहास में अभूतपूर्व है।

3. आबादी में फूट डालना
अरब क्रांति के कई सफल आंदोलन एक जैसे देशों में हुए लेकिन उनकी सरकारों ने अपने-अपने यहां मौजूद सामाजिक विभाजनों का फायदा उठाया। सऊदी और बहरीनी सरकारों ने अपने देशों के विरोध प्रदर्शनों को ईरान से इशारा पाने वाले असंतुष्ट शियाओं की कारगुजारी बताया। इसी तरह सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने देश के अल्पसंख्यक समूहों से समर्थन जुटाकर बहुसंख्यक सुन्नियों को काबू करने की जुगत लगाई।

4. कुलीनों को एकजुट करना
अरब क्रांति ने एक बार फिर सरकारों का लचीलापन दिखाया कि वे कुलीन सामंजस्य बनाए रख सकते हैं। मिस्त्र में होस्नी मुबारक के पतन के बीज विरोध प्रदर्शन शुरू होने से महीनों पहले पड़ गए थे, जब उत्तराधिकार के मसले पर उनमें और सेना में भयंकर सत्ता संघर्ष शुरू हो चुका था। मुबारक के उत्तराधिकारी मोहम्मद मोरसी को भी सैन्य समर्थन के अभाव में कुर्सी छोड़नी पड़ी। इसी तरह यमन में भी हुआ। यमन की सरकार पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुई, हालांकि वह प्रभावी रूप से सत्ता के दलालों से समर्थन जुटाने में उतनी सफल नहीं हुई।

लगता है कि चीन के नए नेतृत्व ने भी इसी तरह के तरीकों पर अमल किया है। उसने भ्रष्टाचार के खिलाफ काफी सख्ती दिखाई है और जनअभियान पर बल दिया है, जिसका आंशिक मकसद नागरिकों के गुस्से को कम करना है।

चीन में सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद पश्चिमी जगत की सभी प्रमुख सोशल मीडिया साइट प्रतिबंधित हैं। चीनी नेटीजन राष्ट्रीय सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, जिसको भी सीसीपी गाहे-बगाहे नियंत्रित करती रहती है।

चीन की आबादी में हान समुदाय की 91 फीसदी हिस्सेदारी है। देश में किसी हिंसक गतिविधि के मामले में उंगली उठाने पर हान और देश के अन्य जातीय समुदायों के समीकरण की सीमित उपयोगिता को सीसीपी खूब समझती है।

कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादारी में गिरावट आई है। ज्यादातर चीनी अब व्यक्तिगत आर्थिक लाभ के लिए सीसीपी में शामिल होते हैं। इन आर्थिक भत्तों में कमी की जा सकती है क्योंकि सीसीपी उपभोक्ता चालित अर्थव्यवस्था को संतुलित करने में लगी हुई है।

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