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अजीबो-गरीब शर्तों में फंसे अभिभावक

एक तरफ गाइडलाइंस ने दी बड़ी राहत तो दूसरी तरफ कई स्कूल अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे
नर्सरी दाखिले के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया 15 जनवरी से शुरू हो रही है। इस बार गाइडलाइंस ने अभिभावकों को बड़ी राहत दी है तो वहीं स्कूल इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। हाईकोर्ट में मामला पहुंचने से दाखिले में देरी होने की संभावना है तो उधर स्कूल आवेदन से पहले ही अजीबो-गरीब शर्तें रख रहे हैं। आज हाईकोर्ट में इस मामले में सुनवाई शुरू होगी। लेकिन जब तक कोर्ट का फैसला पूरी तरह नहीं आ जाता तब तक अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी रहेगी।

इस बार 30 मार्च तक दाखिला प्रक्रिया चलेगी और प्वांइट सिस्टम के आधार पर दाखिला होगा। स्कूल अभी से अपने नियम बता रहे हैं लेकिन इनसे घबराने की जरूरत नहीं है, अभिभावकों को चाहिए कि वे गाइडलाइंस को पढ़कर कायदे से आवेदन करें।

ग्रामीण-बाहरी दिल्ली में स्कूलों की दूरी अधिक 
इस बार दूरी वर्ग का दायरा बढ़ाया गया है। बीते साल जहां पांच किलोमीटर का दायरा था तो वहीं इस बार आठ किलोमीटर तक के दायरे में आने वाले स्कूलों में अभिभावक आवेदन कर सकते हैं। इसके सबसे अधिक 70 प्वाइंट तय किए गए हैं लेकिन नजफगढ़, रनहौला, बवाना व नरेला जैसे ग्रामीण व बाहरी दिल्ली के कई इलाके ऐसे हैं जहां 11 किलोमीटर तक कोई स्कूल नहीं। ऐसे अभिभावकों की दिक्कतें सबसे अधिक हैं।

क्या करें: गाइडलाइंस का मामला कोर्ट में है। अभिभावक संघ ने यह मामला उठाया है कि किलोमीटर का दायरा दस किलोमीटर करने की मांग की गई है। यदि कुछ बदलाव नहीं होता है तो ऐसे अभिभावकों को विशेष छूट दी जाएगी। जिनके अपने घर हैं उन्हें साबित करना होगा कि उनके घर से आठ किलोमीटर के दायरे में कोई भी स्कूल नहीं है। इस आधार पर उनका दायरा बढ़ेगा। वहीं जो अभिभावक किराये पर रहते हैं उन्हें चाहिए कि वे स्कूलों के आसपास किराये पर घर लें। उन्हें रेंट एग्रीमेंट की जरूरत होगी।

एल्युमनी वर्ग में पांच साल से अधिक पढ़े होने की शर्तें
एल्युमनी वर्ग में भी स्कूल प्वाइंट देते हैं। इस वर्ग में माता-पिता जिन स्कूल में पढ़ चुके हैं वहां बच्चों का दाखिला करा सकते हैं। उन्हें इसके पांच प्वाइंट मिलेंगे। माता-पिता कितने साल तक पढ़े होने चाहिए, इस बाबत कोई नियम नहीं है। लेकिन कुछ स्कूल दसवीं तक पढ़ने की शर्त रख रहा है तो किसी का कहना है कि माता-पिता स्कूल के12वीं के छात्र रहे हों। ऐसे में उन अभिभावकों को सबसे अधिक दिक्कतें आ रही हैं जो किसी स्कूल में एक या फिर दो साल ही पढ़े हो।

क्या करें: एल्युमनी वर्ग में बच्चे का दाखिला कराने के लिए दो बातों का ध्यान रखें। पहली बात, ऐसी शर्तें लगाने वाले स्कूलों की लिखित शिकायत निदेशालय को करें। इसके बाद उसी स्कूल में आवेदन करें। यह न देखें कि उनकी क्या शर्त है। स्कूलों को नियम के मुताबिक ही दाखिला देना होगा। दूसरी बात, सिर्फ एल्युमनी वर्ग के अलावा दूरी वर्ग में भी आवेदन करें। दूरी के प्वाइंट 70 तय किए गए हैं। ऐसे में दोनों वर्ग में आवेदन करने से अधिक प्वाइंट मिलेंगे और सीट पक्की जल्दी होगी।

मांसाहारी और शाकाहारी के भी प्वाइंट
द्वारका स्थित फैब इंटरनेशनल स्कूल मांसाहारी और शाकाहारी होने के भी प्वाइंट दे रहा है। स्कूल के मुताबिक, यदि कोई अभिभावक शाकाहारी है और वो दूरी वर्ग में आवेदन करता है तो उससे 60 प्वाइंट दूरी के 10 प्वाइंट शाकाहारी होने के मिलेंगे। इसके अलावा मांसाहारी के पांच प्वाइंट देने की बात कही है। बता दें कि बीते साल भी 60 से अधिक स्कूलों ने ऐसी शर्तें रखी थीं। अभिभावक संघ का कहना है कि ऐसी शर्तें निजता के अधिकार का उल्लंघन है।

क्या करें: गाइडलाइंस में इस तरह की शर्तें नहीं हैं। कोई भी स्कूल अभिभावकों की किसी भी पसंद और नापसंद को आधार नहीं बना सकता। यदि कोई प्रॉस्पेक्टस में इनका उल्लेख करता है तो आप तुरंत उसकी फोटो खींच कर निदेशालय को लिखें और उसे ई-मेल करें। पिछले साल के रिकॉर्ड के मुताबिक, 576 शिकायतें ऐसी शर्तो की आई थीं। इन पर सबसे पहले कार्रवाई की गई थी। 25 से अधिक स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। उन्हें सजा के तौर पर अतिरिक्त समय देने के लिए कहा गया था। शिकायत करते समय इन बातों का ध्यान रखें।


सिबलिंग में नियम स्पष्ट नहीं
सिबलिंग वर्ग में उन छात्रों का आवेदन स्वीकारा जाएगा जिनके सगे भाई या बहन उसी स्कूल में पढ़ते हों, लेकिन कई स्कूल ऐसे भी हैं जो ताऊ या चाचा के बच्चों को भी सिबलिंग में स्वीकारते हैं। दरअसल, इस बाबत किसी भी स्कूल में साफ नियम नहीं। अभिभावकों को दिक्कत तब होती है जब वे दस स्कूल में एक साथ आवेदन करते हैं। मान लीजिए किसी परिवार के चार बच्चे अगल-अलग स्कूल में पढते हैं। यदि अभिभावक सिबलिंग वर्ग में चारों में आवेदन करता है तो कुछ स्वीकारेंगे तो कुछ नहीं। ऐसे में नियमों में एकरूपता जरूरी है।

क्या करें: एमएम पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रूमा पाठक कहती हैं कि ऐसे स्कूलों की सूची तैयार करें जहां परिवार के चाचा, ताऊ के बच्चे व सगे भाई-बहन पढ़ते हैं। उनके नियमों को जानें। जो स्कूल परिवार के सभी बच्चों को सिबलिंग के दायरे में लेते हैं वहां पहले आवेदन करें। इसके बाद उन स्कूलों की ओर रुख करें जहां सगे भाई-बहन पढम्ते हैं। रूमा कहती हैं कि निदेशालय को चाहिए कि वे इस नियम में एकरूपता लाए।

हाईकोर्ट में मामला दाखिले में देरी के संकेत
स्कूलों की एसोसिएशन एक्शन कमेटी ने गाइडलाइंड के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। स्कूलों का कहना है कि उनकी स्वायत्ता बरकरार रखी जानी चाहिए। प्वाइंट सिस्टम खुद से बनाने की छूट होनी चाहिए। बता दें कि इस बार सभी के लिए समान प्वाइंट सिस्टम बनाया है। कोई भी स्कूल बीते साल की तरह खुद से 100 प्वाइंट का फॉर्मूला तैयार नहीं कर सकता। सूत्र कहते हैं कि यदि कुछ बदलाव होता है तो आवेदन की तिथि 15 जनवरी से आगे बढ़ सकती है। उधर, अभिभावकों की एसोसिएशन का कहना है कि अगर दाखिला लेने का कम समय मिलेगा तो काफी परेशानी होगी। क्योंकि 30 मार्च 2013 तक ही दाखिला लिया जा सकता है।

क्या करें: दाखिले में देरी नीतिगत फैसला है। 30 मार्च तक ही दाखिला होगा। ऐसे में कम दिन बचे हैं लेकिन इससे घबराएं नहीं। यदि आवेदन का समय और भी बढ़ता है तो ऑनलाइन विकल्प को अपनाएं। एक सप्ताह का लक्ष्य रखें। एक सप्ताह में 10 से अधिक स्कूलों में आवेदन करें। इससे समय बचेगा और देरी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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