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राजधानी में विकसित होंगे पांच टीओडी

 नई दिल्ली प्रमुख संवाददाता

वाहनों के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए जहां एक ओर ट्रैफिक कंजेशन टैक्स लगाने का प्रस्ताव एमसीडी ने तैयार किया है, वहीं यूटीपैक और डीडीए मिलकर ट्रांजिट ओरिएंटिड कॉरीडोर (टीओडी) को विकसित करने में जुटे हैं। कड़कड़डृूमा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है जिसमें लगभग बीस हजार विभिन्न श्रेणी के मकानों का निर्माण किया जाना है। इसका उद्देश्य लोगों को आवागमन के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है ताकि सड़कों से प्राइवेट वाहनों की संख्या को कम किया जा सके, लोग रहने से लेकर मनोरंजन, शॉपिंग इत्यादि के लिए पैदल ही आ जा सकें।

वर्ष 2013 के अंत में इस प्रोजेक्ट के संदर्भ में यूटीपैक ने अपनी रिपोर्ट भी पेश की। रिपोर्ट में प्रोजेक्ट के फायदे और भविष्य की योजना का भी जिक्र किया गया। वहीं डीडीए ने भी पायलट प्रोजेक्ट को देखते हुए चार अन्य स्थानों पर भी ऐसे कोरीडोर बनाने के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है। डीडीए अधिकारियों का कहना है कि टीओडी में हाईराइज, लो राइज मकानों के साथ-साथ जमीन का अधिक से अधिक उपयोग करने की योजना है।

इतना ही नहीं लोगों को आवागमन के लिए घर के 300 मीटर से लेकर 2000 मीटर तक के दायरे में ही सार्वजनिक वाहन सेवा उपलब्ध हो सके, ऐसी व्यवस्था की जाएगी। इसमें मेट्रो का सहयोग भी लिया जाएगा। कहां बनेंगे टीओडीपहला टीओडी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कड़कड़डूमा में बनाने का काम शुरू किया गया हैछतरपुर से अर्जनगढ़ के बीच दूसरा टीओडी विकसित किया जाएगाद्वारका सेक्टर-21 से द्वारका के मध्य तीसरे टीओडी को बनाने का प्रस्ताव हैपीरागढ़ी से टीकरी कलां पर बनेगा चौथा टीओडी कोरीडोरनेहरूप्लेस से बदरपुर पर अंतिम टीओडी कोरीडोर बनाने की योजना हैक्या है योजना टीओडी कोरीडोर में इलाके को इस प्रकार से विकसित किया जाएगा कि लोगों को जहां मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (एमआरटीएस)से जुड़कर सार्वजनिक वाहन सेवा का अधिक लाभ मिल सके।

वहीं उनके रहने के लिए मकान, मनोरंजन के लिए मॉल, मल्टीप्लेक्स, कार्य के लिए कामर्शियल जगह एवं शिक्षा व अन्य कार्य से जुड़े संस्थान का निर्माण संभव हो सके। यूटीपैक के अधिकारी के अनुसार टीओडी में लोग दस मिनट पैदल चलकर किसी भी सार्वजनिक वाहन सेवा से सीधे जुड़ सकेंगे। भूमि का मिश्रित उपयोग किया जाएगा। कैसे इस्तेमाल होगी जमीन रहिायशी क्षेत्र के लिए लगभग 20 से साठ फीसदी तक कार्यक्षेत्र के लिए तीस फीसदी और उससे अधिकसार्वजनिक वाहन सेवा व अन्य सार्वजनिक सेवा के लिए पंद्रह फीसदी अथवा उससे अधिक।

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