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कानून के छात्रों को दिन रात कैंपस में रहना होगा

नई दिल्ली। वरिष्ठ संवाददाता

राजधानी स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) के छात्रों को कोर्स की अवधि में कैंपस में ही रहना होगा। हाईकोर्ट ने विधि विश्वविद्यालय में पांच वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम को पूरी तरह से आवासीय बनाए जाने के फैसले को सही ठहराया है। इसे चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि विश्वविद्यालय के नियम व शर्तें तय करना छात्र का काम नहीं है।

जस्टिस मनमोहन ने विधि विश्वविद्यालय परिसर में रहकर अध्ययन करने की अनिवार्यता के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि छात्र पूरी तरह से आवासीय विश्वविद्यालय में रहकर पढ़ाई नहीं करना चाहते हैं तो उनके पास किसी अन्य विश्वविद्यालय में दाखिला लेने का विकल्प मौजूद है। हाईकोर्ट ने कहा है कि यह तय करना विश्वविद्यालय का काम है कि पाठ्यक्रम आवासीय सुविधा के साथ चलाया जाए या नहीं। जस्टिस मनमोहन ने कहा है कि कानून का छात्र होने के नाते याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय पर नियम और शर्ते नहीं थोप सकता।

हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के बीए एलएलबी पाठ्यक्रम के एक छात्र की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि पांच साल तक विश्वविद्यालय परिसर में रहने की व्यवस्था न सिर्फ आर्थिक रूप से बोझिल होने के साथ-साथ अवैध भी है। छात्र की ओर से वरिष्ठ अधविक्ता मुकुल गुप्ता ने पांच साल तक विश्वविद्यालय परिसर में रहने की अनिवार्यता को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रावधानों के खिलाफ बताया था। हाईकोर्ट ने कहा कि आवासीय सुविधा आधारित विश्वविद्यालय की स्थापना में कोई कानूनी बाधा नहीं है।

तुलना करना सेब और संतरे जैसा हाईकोर्ट ने कहा है कि पुराने इंजीनियरिंग कॉलेज और नये कॉलेज की तुलना नहीं की जा सकती है। यदि हम इसकी तुलना करते हैं तो यह सेब और संतरे के बीच तुलना करने जैसा होगा। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एनएलयू और इंजीनियरिंग कॉलेजों के शुल्क की तुलना किए जाने को गैर वाजबि बताते हुए की। फीस की बोझ को लेकर साक्ष्य नहींहाईकोर्ट ने छात्र की ओर से उन दलीलों को बेबुनियाद बताया जिसमें कहा गया था कि पांच साल तक छात्रावास में रहकर पढ़ाई करने से आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

हाईकोर्ट ने कहा है कि इस बारे में याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जिससे पता चलता हो कि विश्वविद्यालय को स्थापित करने में आए खर्च के अनुरूप शुल्क नहीं लिया जा रहा है। ं।

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