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सूचना के लिए चुकाने पड़े 20 हजार रुपये

हरादून। मुख्य संवाददाता

आरटीआई के तहत जानकारी मांगने पर आरटीओ कार्यालय ने फरियादी को 10,112 पन्नों का बंडल थमा दिया, वो भी 20,224 रुपये के नकद भुगतान पर। फरियादी को झटका तब लगा जब मांगी गई सूचना सिर्फ 40 पन्नों में ही दर्ज थी, उस पर भी कई अहम बिंदुओं पर सूचना फिर भी नहीं दी गई। महानगर बस सेवा महासंघ के अध्यक्ष विजय वर्धन डंडरियाल ने आरटीओ कार्यालय से दून के विभिन्न मार्गों पर चल रहे विक्रम और सिटी बसों के बारे में आरटीआई के जरिए आठ बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी।

विभाग ने उन्हें बताया कि मांगी गई जानकारी देने में 10,112 पन्ने लग रहे हैं, इसलिए उन्हें 20,224 रुपये जमा करने होंगे। डंडरियाल ने उक्त रकम जमा कर दी। लेकिन 10,112 पन्ने पढ़ने के बाद उन्हें अपने मतलब की जानकारी सिर्फ 40 पन्नों में ही मिल पाई। डंडरियाल का कहना है कि जो काम सिर्फ 80 रुपये में हो सकता था, उसके लिए 20,224 रुपये खर्च किए गए। उस पर तीन अहम बिंदुओं पर जानकारी ही नहीं दी गई। उन्होंने इसके खिलाफ प्रथम विभागीय अपीलीय अधिकारी के पास अपील की है।

आरटीओ पर लगाया भेदभाव का आरोप नरदेव शास्त्री मार्ग स्थित सिटी बस सेवा महासंघ कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विजयवर्धन डंडरियाल ने बताया कि मांगी गई सूचना में आरटीओ ने बताया कि साल 2013 में फुटकर सवारी ढोने पर एक ही विक्रम का चालान किया गया। जबकि विक्रम वाले परमिट शर्तों का उल्लंघन करते हुए फुटकर सवारी उठा रहे हैं। विभाग ने खुद लिखित जवाब में स्वीकार किया है कि ड्राइवर कंडक्टर के वर्दी न पहनने पर सिटी बस का चालान किया गया, जबकि इसी शर्त का उल्लंघन करने पर एक भी विक्रम का चालान नहीं हुआ।

इससे साफ जाहिर होता है कि आरटीओ तय परमिट के अनुसार चल रहे सिटी बसों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, जबकि शर्तों के विपरीत चल रहे विक्रमों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाता है। इस मौके पर संयोजक गोपाल सिंह भंडारी, महामंत्री विपिन शर्मा के अलावा अनुज चंदेल, देवेंद्र गैरोला, सतनाम सिंह, राजेंद्र शर्मा, प्रदीप राणा, केसर सिंह रावत आदि शामिल हुए।

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