DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दुनिया में परोपकार से बड़ी कोई धर्म नहीं

फिरोजाबाद,हिन्दुस्तान संवाद। धन जीविका का साधन हो सकता है। लेकिन धन से साधना नहीं हो सकती। साधन सम्पन्न लोगों को धन का परोपकार में उपयोग करना चाहिए। जो लोग अपने धन को परोपकार में लगाते हैं। वही सच्चे धनवान होते हैं। यह उद्गार साकार वशि्व हरि ने मौढ़ा कनैटा के निकट चल रहे सत्संग में रविवार को व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संसार में परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है।

लेकिन आज के भौतिकवादी युग में अधिकांश लोग अपने ही उपकार में लगे रहते हैं। इस कारण गरीब और कमजोर तबके की समस्याएं बढ़ती जा रहीं है। वशि्वहरि ने कहा कि आज हर काम के लिए धन की आवश्यकता होती है। बिना धन के कोई कार्य सम्पन्न नहीं हो पाता। लेकिन लोगों को यह धन भी ईमानदारी के साथ कमाना चाहिए। क्यों कि जो इंसान धन मेहनत व ईमानदारी से कमाता है, उसी पर हरि की कृपा होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी इंसान को जरूरत से ज्यादा धन का संचय नहीं करना चाहिए।

दूसरों का हक मार कर धन इकटठा करना महापाप है। हर इंसान को इस पाक कर्म से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानवता की सच्ची सेवा करने से परमात्मा की सहज कृपा हो जाती है। गरीब, असहायों की बगैर किसी भेदभाव के सेवा करना ही सच्चा मानव धर्म है। इसे अपनाकर हम स्वयं का ही नहीं, दूसरों का भी कल्याण कर सकते हैं। फोटो कैप्शन----10--------साकार वशि्व हरि के मौढ़ा कनैटा पर चल रहे प्रवचन के दौरान उमड़ी भक्तों की भीड़।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दुनिया में परोपकार से बड़ी कोई धर्म नहीं