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तीनों बहनों को मिले उनके पिता

 कार्यालय संवाददाता पटना। एक हफ्ते से अधिक समय से प्रयास ट्रस्ट होम में रहने वाली तीन बहनों को उनके पिता मिल गये। नंदनी के पिता नंद किशोर वशि्वकर्मा रविवार को अपनी बच्ची को खोजते पटना स्थित प्रयास ट्रस्ट होम पहुंचे। तीनों बच्चियोंं के साथ पिता तीन घंटे तक रहे। कोई सबूत न मिलने के कारण नंदनी के पिता को मंगलवार को बुलाया गया है। उसी दिन बाल कल्याण केन्द्र समिति की बैठक भी बुलाई गई है।

साथ ही नंद किशोर की काउंसिलिंग भी की जाएगी। ये बच्चाियां 28 दसिंबर 2013 को बरौनी स्टेशन पर मिली थीं। जीआरपी थाने ने तीनों बच्चियोंं को बरामद कर राजधानी के प्रयास ट्रस्ट होम में पहुंचाया था। तीनों लड़कियों का रो-रोकर बुरा हाल था। इनमें सबसे बड़ी बच्ची आठ साल की है। उसका नाम राज नंदनी है। नंद किशोर ने बताया कि दो दिन पहले टीवी व समाचार पत्र के माध्यम से उन्हें अपनी बच्चियोंं के बारे में पता चला। प्रयास ट्रस्ट वालों से दो जनवरी को बातचीत हुई।

साधन नहीं रहने के कारण दो जनवरी को नहीं आ पाये। वे नवादा स्टेशन रोड पर ग्रिल बनाने का काम करते हैं। नौ हजार रुपये महीना उनकी आमदनी है। वे तीनों बच्चियोंं को हॉस्टल में रखना चाहते हैं ताकि उनकी परवरशि बेहतर ढंग से हो सके। उन्होंने बताया कि तीन माह पहले उनकी पत्नी गीता देवी उर्फ रिंकू देवी मुहल्ले के एक लड़के राहुल राज के साथ इन तीनों बच्चियोंं को लेकर चली गई थी। राहुल मोबाइल की दुकान चलाता है।

मुझे पापा के साथ नहीं जानाजब राज नंदनी प्रयास ट्रस्ट आई थी तो उसने बताया था कि वह गंगापुर की रहने वाली है। वह तीन बहनें हैं। उसका कोई भाई नहीं है। मां रिंकू देवी के साथ तीनों बहनें घर से निकली थीं। उनलोगों को नानी के यहां कौआकोल ट्रेन से जाना था। बीच में मां कोई सामान लाने के लिए ट्रेन से उतरी। लेकिन ट्रेन खुल गई। तब उसने पापा का नाम राहुल राज बताया था जो गंगापुर में रहते हैं।

राज नंदनी ने बताया कि नंद किशोर वशि्वकर्मा उसे मारते-पीटते हैं, जिस कारण वह उनके साथ नहीं जाना चाहती है। प्रमाण के साथ बुलाया गया मंगलवार को प्रयास भारती ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ सुमन लाल ने बताया कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि तीनों बच्चाियां नंदकिशोर की हैं। मंगलवार को नंदकिशोर को पहचान पत्र, राशन कार्ड, फैमिली फोटोग्राफ, वार्ड कमशि्नर या मुखिया का पत्र लिखवा कर मंगाया गया है। पूरी जांच-पड़ताल के बाद उन बच्चियोंं को उनके पिता के हाथ सौंपा जाएगा।

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