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भूखे टाइगर को अभी भी शिकार का इंतजार

मुरादाबाद। कार्यालय संवाददाता

हफ्ते भर से पूरे क्षेत्र में आतंक का पयार्य बने टाइगर ने भले ही दो जाने ली हो। भले ही उसके पंजे से घायल एक युवक अभी भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा हो लेकिन उसकी भूख नहीं मिटी है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चंदौसी की घटना के दौरान टाइगर ने शिकार को खाया लेकिन इसके बाद से कहीं भी इसके किसी भी हमले में सफल होने के निशान नहीं मिले हैं।

जटपुरा में भी किसी जानवर को दौड़ाने के निशान मिले लेकिन शिकार होने की पुष्टि नहीं थी। चंगेरी में भी युवक का शिकार करने में वह भले ही सफल रहा लेकिन उसे खा नहीं सका। इसके अलावा घटनास्थल के आसपास भी किसी जानवर को दौड़ाने की कोशशि होती दिखी। सभी घटनाओं के आंकलन के आधार पर अधिकारी मान रहे हैं कि हफ्ते भर से टाइगर ने कोई शिकार नहीं किया है। और यही कारण है कि वह आसान शिकार की तलाश में आबादी पर हमला कर रहा है।

जीपीस के सहारे रास्ता समझने में जुटे विशेषज्ञमुरादाबाद। कार्यालय संवाददाताचंदौसी के मिठनपुर मौजा से लेकिर चंगेरी गांव तक पहुंच चुके टाइगर को पकड़ने के साथ ही अधिकारी उसके हर संभावित रास्ते को भी समझने में जुट गए हैं। जीपीएस रीडिंग के जरिये उसी सभी लोकेशन से रास्ता बनाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि टाइगर उत्तराखंड की ओर ही बढ़ रहा है। टाइगर की जीपीएस रीडिंग पर नजर रखे डीएफओ मुरादाबाद डॉ वीसी ब्रह्मा की मानें ने 52 किलोमीटर के सफर के दौरान वह मिठनपुर मौजा से उत्तर की ओर बढ़ रहा है।

इसी दिशा में वह पहले छजलैट के जटपुरा पहुंचा और एक रात पहले लोदीपुर गांव होते हुए चंगेरी पहुंचा होगा। रात में नील गाय का शिकार करने की कोशशि की लेकिन किसी कारण सफल नहीं हो सका और शायद भूख और आसान शिकार होने की संभावना के चलते ग्रामीण पर टूट पड़ा। उत्तर की ओर बढ़ने के चलते अधिकारियों ने राहत की सांस जरूर ली है। साथ ही उसके रास्ते में आने वाले गांवों में पहले ही संपर्क कर लोगों कोसतर्क रहने केलिए भी कहा जा रहा है।

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