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आरोपी नेताओं पर दर्ज केस हो सकते हैं वापस

उत्तर प्रदेश सरकार मुजफ्फरनगर दंगे से पहले भड़काऊ भाषण देने में नामजद हुए नेताओं के मुकदमे वापस लेने की तैयारी में है। इनमें बसपा सांसद व कांग्रेसी नेता शामिल हैं। इस बाबात न्याय विभाग के विशेष सचिव आर.एन. पाण्डेय ने मुजफ्फरनगर पुलिस-प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है।

सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने  मुजफ्फरनगर जिला प्रशासन को एक पत्र भेजा है। ये पत्र 30 दिसंबर,2013 को भेजा गया था। हालांकि शासन का कोई भी अधिकारी इस मसले पर कुछ भी कहने से इनकार कर रहा है। सूत्रों का दावा है कि जिस मुकदमे की वापसी के लिए पत्र लिखा गया है। उसमें बसपा नेता कादिर राणा समेत आधा दजर्न स्थानीय नेता शामिल हैं। इस मामले में कादिर राणा कोर्ट में सरेंडर कर जेल गए थे। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर में 8 सितंबर को हिंसा के बाद पुलिस ने दंगा भड़काने के आरोप में कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए  थे।

ये हुए थे नामजद: मुजफ्फरनगर में 30 अगस्त को हुई पंचायत में भड़काऊ भाषण देने और शांति भंग के आरोप में बसपा सांसद कादिर राणा, नूर सलीम राणा, बसपा विधायक जमील अहमद, कांग्रेसी नेता सईदुज्जमा, सुल्तान नासिर, नौशाद कुरैशी, मौलाना जमील, पप्पू राणा, आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

भाजपा ने जताया विरोध: भाजपा ने अखिलेश सरकार पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार इसके जरिए एक वर्ग विशेष को खुश करने में लगी है।

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