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समानांतर नहीं, अलग पुलिस बल बना रहे हैं

अलग गोरखालैंड राय की मांग को लेकर बार-बार बंद से लोगों को हो रही परेशानियों का जिम्मेदार कौन है? पिछला बेमियादी बंद 16 जून को शुरू किया गया था। केंद्र सरकार के सकारात्मक रवैए को देखते हुए हमारी पार्टी ने बंद में मोहलत देने का फैसला किया और 22 जून से पांच जुलाई तक बंद स्थगित कर दिया गया। फिर छह जुलाई से बेमियादी बंद शुरू कर दिया जाएगा। हम निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं, इसलिए लोगों को कुछ असुविधाएं तो होंगी ही। हम बेमियादी बंद की अपील के पहले असुविधाओं से बचने के लिए पर्यटकों को पहाड़ छोड़कर मैदान लौट जाने की सलाह भी देते हैं। बंद के पहले जो पर्यटक आज पहाड़ नहीं छोड़ पाते, उन्हें बंद के दौरान बाहर निकालने में मोर्चा के कार्यकर्ता मदद करते हैं। राय सरकार ने अलग राय की मांग तो ठुकरा दी है पर पर्वतीय परिषद को और यादा स्वायत्तता देने की पेशकश की है। उस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? हमें अलग राय से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। लंबे आंदोलन के बाद 22 अगस्त 1ो जब दार्जिलिंग समझौते पर तितरफा समझौता हुआ था तो पर्वतीय परिषद की बात हमने इसलिए मान ली थी यह मांग अचानक नहीं उठी है। यह दशकों पुरानी मांग है। पहाड़वासियों की अपनी पहचान और अस्मिता के लिए उठी यह मांग संविधान विरोधी भी नहीं है। हम भारत गणराय का ही एक राय बनना चाहते हैं। राय सरकार हमें खिलौना समझती हैं। इसलिए दार्जिलिंग पर्वतीय परिषद को और प्रशासनिक अधिकार व वृहद स्वायत्तता देने की राय सरकार की पेशकश हमने ठुकराई है। आप तितरफा बैठक पर क्यों जोर दे रहे हैं? क्योंकि हमारी मांग पर केंद्र को ही मुख्यत: विचार करना है। इसीलिए हम चाहते हैं कि अलग गोरखालैंड राय के मसले पर केंद्र, राय सरकारों के साथ गोरखा जन मुक्ित मोर्चा की तितरफा बैठक हो। तितरफा बैठक में हम केंद्र सरकार को सारे दस्तावेज सौंपकर बताएंगे कि अलग राय क्यों जरूरी है? हम केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटील से पहले ही मिल चुके हैं। उनसे हमारे दल की हुई बातचीत कोफी संतोषजनक थी। हम चाहते हैं कि अलग राय की मांग पर वार्ता केंद्र सरकार की मौजूदगी में हो, इसीलिए 27 जून को कोलकाता में मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता में मेरे दल ने यह मसला नहीं उठाया। मुख्यमंत्री ने जब क हा कि वे आंदोलनकारियों से बिना शर्त बातचीत को तैयार हैं तो मैंने उनसे बातचीत के लिए अपने चार नेताओं को भेजा और उनसे क हा कि वे तितरफा बैठक के एकमात्र एजेंडे पर कायम रहें। अलग राय की मांग जब तक नहीं मानी जाती, संग्राम जारी रखेंगे। आपकी पार्टी दार्जिलिंग को छठवीं अनुसूची में शामिल करने का विरोध क्यों कर रही है? इससे गोरखा लोग जातियों व उपजातियों में बंट जाएंगे। एक गोरखा भाई ही दूसरे भाई को संदेह की नजरों से देखने लगेगा।छठवीं अनुसूची से कुछ भी हासिल नहीं होगा। छठवीं अनुसूची पर कोलकाता में मुख्यमंत्री के साथ जो बैठक हुई थी, उस प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में एक मैं भी था पर हमें बाहर बिठा दिया गया और अंदर सिर्फ सुभाष घीसिंग को अकेले ले जाया गया। बैठक खत्म हुई और जब हम बागडोगरा पहुंचे तो जश्न मनाया गया। मुझे लग गया कि घीसिंग छठवीं अनुसूची की आड़ में पहाड़वासियों को मूर्ख बना रहे हैं। आज हालत यह है कि प्रतिशत पहाड़वासी हमारे दल के साथ हैं। जनसमर्थन के कारण ही अनशन का फैसला होते ही सैंकड़ों लोग भूख हड़ताल पर बैठ जाते हैं। आपने गोरखालैंड पुलिस बनाने की घोषणा क्यों की है? राय पुलिस पर हमारा भरोसा नहीं है। हमारे राजनीतिक आंदोलन को दबाने के लिए राय पुलिस ने दमनात्मक कार्रवाई की। हम समानांतर नहीं, अलग पुलिस बल बनाने जा रहे हैं। हमारा पुलिस बल हमारी पार्टी की राजनीतिक रैलियों व अन्य गतिविधियों में सुरक्षा का दायित्व संभालेगा।

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