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अपना-अपना खेल

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अगर विश्व क्रिकेट पर अपनी तानाशाही चला पाता है, तो इसकी वजह यही है कि वह दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है। उसकी अमीरी की वजह यही है कि क्रिकेट भारत में सबसे लोकप्रिय खेल है, जिसे देखने के लिए दर्शक पैसा और वक्त लगाने को तैयार हैं। क्रिकेट अब मुख्यत: भारतीय उपमहाद्वीप का खेल है, जिसके बारे में समाजशास्त्री आशीष नंदी ने लिखा है कि क्रिकेट एक भारतीय खेल है, जिसका अविष्कार संयोगवश इंग्लैंड में हुआ। इस बात की समाजशास्त्रीय, राजनीतिक व्याख्याएं करने की बहुत कोशिशें हुई हैं कि कोई खेल किसी देश विशेष में क्यों लोकप्रिय होता है। इसी के साथ जुड़ा हुआ एक सवाल यह भी है कि किसी खास देश में किसी खास खेल के शानदार खिलाड़ी क्यों निकलते हैं? सुविधाएं और प्रोत्साहन का अपना महत्व है, लेकिन बात इससे गहरी है। ब्राजील की गंदी बस्तियों से निकले कुपोषित बच्चों में से नामी फुटबाल खिलाड़ी निकले और इथियोपिया जैसे देश नियमित रूप से मैराथन दौड़ाक पैदा करते हैं। जमैका दक्षिण अमेरिका का एक छोटा-सा द्वीप है और इस देश की जनसंख्या तीस लाख भी नहीं है, लेकिन यहां से कितने सारे दौड़ाक निकले हैं।

उसेन बोल्ट जैसा जादूगर इसी देश से आया है। यह भी ध्यान देने की बात है कि जमैका से मुख्य रूप से छोटी दूरी के तेज धावक निकले हैं। कुछ वैज्ञानिक पिछले करीब बीस साल से जमैका के नौजवानों का अध्ययन कर रहे हैं, वे जानना चाहते हैं कि जमैका के नौजवानों की रफ्तार का राज क्या है? उन्होंने 1996 में कुछ बच्चों को चुना और उनकी दौड़ने में दिलचस्पी और रफ्तार का 2010 तक लेखा-जोखा रखा। उन्होंने पाया कि जिन बच्चों के दोनों घुटनों का अनुपात बराबर था, उनकी दौड़ने में दिलचस्पी ज्यादा थी और उनकी रफ्तार भी ज्यादा थी। यह सभी जानते हैं कि हर व्यक्ति के शरीर में दाहिने और बाएं हिस्से में हल्का-सा फर्क होता है। इस फर्क को अस्थिर असमानता कहते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि दोनों घुटनों में यह असमानता जितनी कम होगी, तेज दौड़ में सफलता की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। उनका कहना है कि जमैका के निवासियों में यह असमानता अन्य लोगों से कम है।

दक्षिण अमेरिका के इन द्वीपों की बहुसंख्यक आबादी अफ्रीका से लाए गए अश्वेत गुलामों के वंशजों की है। मुमकिन है कि जमैका निवासियों के पूर्वज अफ्रीका के किसी एक क्षेत्र से लाए गए हों, जहां के लोगों में यह विशेषता रही हो या विकसित हुई हो। यह भी देखा गया है कि अफ्रीका के पहाड़ी क्षेत्रों से लंबी दूरी के धावक ज्यादा आते हैं और मैदानी इलाकों से छोटी दूरी के। जाहिर है, भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक शारीरिक विशेषताएं विकसित होती हैं। देशों की खेल योजनाएं बनाने में भी यह शोध मददगार हो सकता है। यह तो सिर्फ जमैका के फर्राटा दौड़ाकों का अध्ययन है, लेकिन इसी तरह के अध्ययन शायद यह बता पाएं कि चीनी लोग बैडमिंटन क्यों इतना अच्छा खेल पाते हैं और ब्राजील या अर्जेटिना में फुटबॉल के जादूगर क्यों पैदा होते हैं? ऐसा नहीं है कि ये सारी बातें पत्थर की लकीर हैं और बदलती नहीं हैं। एक दौर में भारत का हॉकी में डंका बजता था और वेस्ट इंडीज ने क्रिकेट में एक से बढ़कर एक प्रतिभाएं पैदा की थीं, लेकिन आज भारत हॉकी में और वेस्ट इंडीज क्रिकेट में कहीं नहीं हैं। यह अच्छा ही है कि खेलों में इतने सामाजिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक, आर्थिक कारक सक्रिय होते हैं कि उनका कोई सरल फॉर्मूला नहीं बनाया जा सकता। इसी वजह से खेलों का आकर्षण और रहस्य बना रहता है।

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