DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अदालत और आर्मी

परवेज मुशर्रफ की विडंबना यह है कि वह कैद से बचने के लिए किसी भी करार से इनकार नहीं करेंगे, बशर्ते वह करार उनके लिए ज्यादा अफसोसनाक न हो। ऐसे लोगों की भी कमी नहीं, जो मुशर्रफ की मौजूदा हालत की तुलना नवाज शरीफ की उस हालत से करते हैं, जब मुशर्रफ के साथ उनका एक करार हुआ था और उन्हें सऊदी अरब जाना पड़ा था। मगर यहां एक बड़ा अंतर है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। नवाज अवाम द्वारा चुने गए हुक्मरां थे, जिन्होंने एक तानाशाह की ‘अदालत’ का सामना किया और अगर आज मुशर्रफ कठघरे में खड़े हैं, तो उनकी वाजिब कानूनी वजहें हैं। यह समझने में कोई गलती नहीं होनी चाहिए कि मुशर्रफ अदालती प्रक्रिया से बचना चाहते हैं। सुविधा के हिसाब से दिल का मरीज बनने और फौजी अस्पताल में दाखिला पाने से लेकर सऊदी अरब के विदेश मामलों के वजीर के दौरे तक की घटनाएं बताती हैं कि मुशर्रफ मुल्क से बच निकलने की सोच रहे हैं। अब उनके वकील से यही उम्मीद है कि वह सोमवार को अदालत में मेडिकल रिपोर्ट का पुलिंदा लहराते हुए कहेंगे कि उन्हें इलाज के लिए विदेश भेजा जाना चाहिए और मुशर्रफ से यह उम्मीद रहेगी कि वह वतन फिर नहीं लौटेंगे।

एक बार मुशर्रफ ने कहा था कि मुल्क की समूची फौज उनके साथ है। ऐसा लगता है कि वह कुछ हद तक सही थे। गए चंद दिनों की घटनाएं यह इशारा करती हैं कि उन्हें फौज का साथ मिल रहा है। इंटर-सर्विस पब्लिक रिलेशंस मुशर्रफ के इस बयान को बकवास बता सकती है, मगर उसने शातिराना तरीके से खामोशी का रास्ता अपनाया है। यह भी गौरतलब है कि मुशर्रफ को फौरन एक फौजी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। यह हमेशा से कहा जाता है कि फौज अपनी बिरादरी के किसी चेहरे को अदालती प्रक्रिया से नहीं गुजरने देती। यह बात अब सच मालूम होती नजर आ रही है।.. एक मुल्क के तौर पर हम परवेज मुशर्रफ के दौर को काफी पीछे छोड़ चुके हैं और अब तो यही भरोसा है कि आने वाले वक्त में उनके लिए कैद न सही, तो कम से कम ऐसी व्यवस्था हो कि वह फिर से हमारी उम्मीद के दरवाजे बंद न कर पाएं। 
द न्यूज, पाकिस्तान

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अदालत और आर्मी