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देश को वायदे की नहीं इरादे की जरूरत: मोदी

देश को वायदे की नहीं इरादे की जरूरत: मोदी

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने आज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम लिए बिना कहा कि लोग उनके खिलाफ अनाप शनाप आरोप लगा रहे हैं लेकिन जो लोग दर्द और पीड़ा में पले हों, उन्हें दूसरों की पीड़ा को समझने और दूर करने के लिए यात्राएं करने की नहीं, काम करने के इरादे की जरूरत होती है।  

मोदी ने तालकटोरा स्टेडियम में योगगुरु रामदेव की ओर से आयोजित रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मैं निराशावादी नहीं हूं। मैंने किसी पद के लिए जन्म नहीं लिया। देश को वायदे की नहीं, बल्कि कुछ करने के लिए इरादे की जरूरत है।

मनमोहन सिंह का नाम लिए बिना भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने कहा कि आज जब लोग ऐसे आनाप शनाप आरोप लगाते हैं तब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं कि ट्रेन में चाय बेचने वाला आज कहां बैठा है। मैंने अपनी मां को दूसरे के घरों में बर्तन साफ करते देखा है और उन्हीं ने ऐसे संस्कार दिए कि मैं निराशवादी नहीं हूं।

अपने परिवार के साथ बचपन में कपास का छिलका (बिनौला) उतारने का काम करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग दर्द और पीड़ा में पले हों, उन्हें दूसरों की पीड़ा को समझने के लिए यात्राएं करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को एक सवाल के जवाब में कहा था कि मोदी का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए विनाशकारी होगा। लोकसभा चुनाव से पहले देश के समक्ष विभिन्न मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने कहा कि मानव संसाधन का सामर्थ्य कुनीतियों के कारण अभिशाप में तब्दील हो गया है और किसी पद के लिए नहीं जन्म लिया, देश को वायदे की नहीं, कुछ करने के इरादे की जरूरत है। उन्होंने योगगुरु और जनता से नेताओं के ट्रैक रिकार्ड को देखने और केवल वायदों पर भरोसा नहीं करने का आग्रह किया।

 

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