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लाभ से वंचित लोग

दिल्ली सरकार अपने सभी उपक्रमों के कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दिल्ली राज्य स्वास्थ्य सेवा योजना के अंतर्गत चिकित्सा लाभ दे रही है, परंतु खेद है कि दिल्ली परिवहन निगम के, जो दिल्ली सरकार का एक मुख्य सार्वजनिक उपक्रम है, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इस लाभ से वंचित रखा गया है। जीवन के अंतिम पड़ाव पर चिकित्सा सेवा योजना का लाभ अत्यंत जरूरी होता है। फिर भी ये लोग उपेक्षित हैं। कई वर्षों से ये लोग इस सुविधा की मांग कर रहे हैं। लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने उन्हें इससे वंचित रखा। दिल्ली के नए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अनुरोध है कि वह इसका लाभ इस तबके को भी उठाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
रोहताश कुमार, मादीपुर कॉलोनी, नई दिल्ली

जरूरी है गठबंधन

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले ही आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने घोषणा कर दी थी- हम न समर्थन देंगे, और न लेंगे। खैर, उन्होंने कांग्रेस से समर्थन ले लिया। वैसे भी गठबंधन दौर में यह हठ दुर्भाग्यपूर्ण होता और इससे देश को नुकसान ज्यादा होता। जनता को फिर से चुनाव में झोंकने वाला यह फैसला कहलाता। अगर आम आदमी पार्टी दिल्ली में हार जाती, तो आम चुनाव में शायद हिस्सा नहीं लेती। लेकिन इस पार्टी को दिल्ली में अच्छा समर्थन मिला और अब तो पार्टी की सरकार है। इसके नेताओं का मनोबल बढ़ा हुआ है। उनका तर्क और लक्ष्य अच्छा है, प्रेरणा योग्य है, लेकिन गठबंधन से दूर रहने की बात देशहित में नहीं है। अगर यह पार्टी आम चुनाव में किसी को समर्थन नहीं देती है, तो त्रिशंकु संसद के आसार हो जाएंगे। इससे जो मुश्किलें आएंगी, उनका क्या? फिर चुनाव में जाने की नौबत आ सकती है। प्रजातंत्र में देशहित में सर्मथन देना पड़ता है। तीसरी शक्ति का उभरना ठीक है, लेकिन अपनी शर्तों पर समर्थन लेने का दंभ गलत है।
युवराज सिंह, जावल, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश

अलग से कृषि बजट हो

मनमोहन सिंह सरकार लेखानुदान पेश करेगी। ऐसे में, नई सरकार को कुछ नया करना चाहिए। अच्छा होगा कि नई सरकार अलग से कृषि बजट का प्रावधान करे। यह तो साफ है कि देश की अर्थव्यवस्था को कृषि ने ही बचाया है। आज हम कृषि उत्पादों को दूसरे देशों में बेच रहे हैं, जबकि दो दशक पहले हम आयात करते थे। देश की विशाल आबादी कृषि पर निर्भर है। फिर भी खेती-किसानी का तबका उपेक्षित है। अत: देश को कृषि बजट की आवश्यकता है। विश्वास है कि राष्ट्रहित में अलग से कृषि बजट की तैयारी होगी।
कृष्णमोहन गोयल, बाजार कोट, अमरोहा, उत्तर प्रदेश

किसका लोकपाल

वयोवृद्ध गांधीवादी नेता और समाजसेवी अन्ना हजारे ने लोकतांत्रिक सुधारों को सुनिश्चित करने के लिए लोकपाल की मांग की और देश में जनांदोलन खड़ा किया। केंद्र सरकार को इस दिशा में सोचने पर विवश होना पड़ा। दिल्ली विधानसभा चुनावों में 28 सीटें जीतकर हैरतअंगेज रूप से कांग्रेस का सफाया कर देने वाली आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, अन्ना हजारे के सहयोगी हुआ करते थे। अन्ना हजारे अपने आंदोलन को गैर-राजनीतिक रूप से चलाना चाहते थे, तो अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्ट राजनीति से निपटने के लिए इसकी सफाई को अपना लक्ष्य बनाया। अपने राजनीतिक जनाधार को बचाने के लिए कांग्रेस लोकपाल विधेयक ले आई और उसे पारित भी करा दिया। इसी लोकपाल की मांग अन्ना हजारे करते-करते थक गए थे। केजरीवाल ने इस लोकपाल को जोकपाल कहा, वैसे अन्ना ने इसका स्वागत किया। लेकिन जनता जानती है कि यह लोकपाल अन्ना हजारे, अरविंद केजरीवाल या आम लोगों का नहीं है, बल्कि कांग्रेस के कुछ लोगों का है। यह लोकपाल राहुल गांधी को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है।
अक्षित तिलक राज गुप्ता, रादौर, हरियाणा

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