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पवन ऊर्जा को प्रोत्साहन देगा केंद्र

ेंद्र सरकार ने हवा से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 50 पैसे प्रति यूनिट प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया है। अक्षय ऊर्जा मंत्री विलासराव मुत्तेवार ने कहा कि वैकल्पिक स्रेतों से ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं जिनके दोहन के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। हाल में सरकार ने सौर ऊर्जा से बिजली बनाने के लिए भी प्रोत्साहन राशि की घोषणा की है। इसके तहत बिजली के सरकारी दाम से यादा आने वाली लागत की भरपाई केंद्र सरकार करेगी। इसके बाद मुत्तेवार का दावा है कि सौर ऊर्जा से 2000 मेगावाट बिजली उत्पादन के प्रस्ताव सरकार के पास आ गए हैं। देश में वैकल्पिक स्रेतों से अभी 12400 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। अगले पांच सालों में इसे 50 हजार मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसमें हवा से अभी 8760 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। यानी दिल्ली जैसे तीन शहरों की जरूरत के लायक बिजली पैदा की जा रही है। विश्व में हवा से सबसे यादा बिजली जर्मनी में 22, अमेरिका में 17 तथा स्पेन में 15 हजार मेगावाट उत्पादन होता है। इसके बाद भारत का नंबर है। वायु से बिजली तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक तथा राजस्थान में बनती है। जहां 225 किलोवाट से लेकर 1.65 मेगावाट क्षमता के प्लांट लगाए गए हैं। यह बिजली सीधे ग्रिड को जाती है। वैसे तो जहां हवा चलती है वहां थोड़ी-बहुत मात्रा में बिजली बनायी जा सकती है लेकिन व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए हवा में 200 वाट प्रति वर्ग मीटर बिजली उत्पादन की क्षमता चाहिए। देश भर में ऐसी 216 साइटों का पता लगाया जा चुका है। बहरहाल, अभी तक पवन ऊर्जा के उत्पादन के लिए निवेश करने पर 80 फीसदी राशि को आयकर छूट दी गई थी। लेकिन अब सरकार ने इसमें बदलाव करते हुए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन देने का फैसला किया है।

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