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जिला अस्पताल में जिंदा को बता दिया ‘मरा’

 लखीमपुर-खीरी। जिन धरती के भगवानों के पास लोग नई जिंदगी की आस लेकर आते हैं। अगर वही डॉक्टर जिंदा को मरा बता दें तो क्या मिसाल दी जाए। ऐसा की एक कारनामा जिला अस्पताल के एक जिम्मेदार डॉक्टर ने कर दिखाया है। हैदराबाद थाना क्षेत्र के परेली गांव की एक लड़की जिला अस्पताल में इलाज कराने आई थी, यहां डॉक्टरों ने कॉलबुक पर उसको मरा दर्ज कर लिया।

पुलिस के पास कॉलबुक पहुंची तो शव को कब्जे में लेने की तैयारी शुरू कर दी है। तब मालूम चला कि लड़की तो मरी ही नहीं। जिला अस्पताल में ही उसका इलाज चल रहा है। इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की खूब किरकिरी कराई। हैदराबाद थाना क्षेत्र के गांव परेली निवासी वेदप्रकाश की बेटी गोल्डी सर्दी लगने के कारण बीमार हो गई थी। उसे बुखार की भी शिकायत थी। शुक्रवार को उसकी तबियत ज्यादा खराब हो गई। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल आए।

परिजनों के मुताबिक इमरजेंसी में डय़ूटी पर मौजूद डॉक्टर ने गोल्डी का परीक्षण किया। नाम, पता भी पूछा। वेदप्रकाश ने गोल्डी को इमरजेंसी में दिखाया। डॉक्टर ने प्राथमिक इलाज के बाद गोल्डी को मेडिकल वार्ड में भर्ती कर लिया। यहां उसका इलाज शुरू हुआ। बताते हैं कि डॉक्टर ने पुलिस कॉलबुक में गोल्डी का नाम पता दर्ज कर पुलिस के पास भेजवा दिया। पुलिस कॉल बुक में गोल्डी को मृत दिखाया गया। जबकि गोल्डी को तो अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती कराया जा चुका था, वहां उसका इलाज चल रहा है।

बाक्सशव ‘गायब’ देखकर सकते में आई पुलिस=बताते हैं कि जिला अस्पताल ने गोल्डी का डेड मेमो पुलिस के पास भेज दिया। सुबह होते ही पुलिस ने गोल्डी के पंचनामे की तैयारी शुरू कर दी। एसएसआई रामसिंह पवार ने एसआई मनोज कुमार और राकेश के साथ शव गृह पहुंच गए। पुलिस को शव गृह में गोल्डी का शव नहीं मिला। यह देखकर पुलिस के भी हाथपांव फूल गए। जिला अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। जिला अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया।

हवा फैल गई कि शव गृह से शव कहां गायब हो गया। पुलिस ने कुछ देर बाद जब मामले की छानबीन शुरू की तो पता चला कि गोल्डी जिंदा है। उसका इलाज जिला अस्पताल के मेडिकल वर्ड में चल रहा है।

लिखा-पढ़ी में फंस गया अस्पताल

इस बार जिला अस्पताल इलाज में लापरवाही की बजाय नए तरह के इल्जामों की चपेट में है। इस बार इलाज में नहीं, लिखा-पढ़ी में जिला अस्पताल के डॉक्टर फंस गए। बताया जाता है कि जब गोल्डी का इलाज कराने उसके मां-बाप जिला अस्पताल पहुंचे तो उसी दौरान हादसे में जख्मी एक व्यक्ति अस्पताल लाया गया था।

उसका परीक्षण हुआ तो वह मृत निकला। अस्पताल प्रशासन को उसका डेड मेमो बनाकर पुलिस को भेजना था। पर इमरजेंसी में इस तरह के काम दूसरे कर्मचारी करते हैं, डॉक्टर उसका निरीक्षण कर दस्तखत करता है। पर इस बार डेड मेमो में मृतक का नाम बदल गया। ‘मामला मेरे भी संज्ञान में आया है। यह डॉक्टर की घोर लापरवाही है। अगर मेरे पास कुछ लिखित में आता है तो डॉक्टर से लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। ’डॉ. नीलम श्रीवास्तव, सीएमएस।

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