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सर्दी, कोहरा और गलन से कांप उठा जिला

लखीमपुर/खमरिया-खीरी। हिन्दुस्तान संवाद

सर्द हवाओं के साथ पारा लगातार गिरता जा रहा है। पूरा दिन सूर्य के दर्शन नहीं हो रहे हैं। घरों में भी लोगों को कंपकंपी छूट रही है।

जरूरी काम से निकलने वाले लोग गर्म कपड़े पहनकर निकलते हैं। शाम होते ही पूरा शहर कोहरे की चादर ओढ़ लेता है। लोगों को सर्दी से बचाने के लिए सरकारी अमला सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर रहा है। कागजों पर अलाव जलवाए जा रहे हैं तो नेताओं को बुलाकर दो चार कम्बल बांट दिए जाते हैं। जबकि लोग किसी तरह से सर्द रातें गुजार रहे हैं। शीतलहरी के भीषण प्रकोप के बावजूद मिल गेट और गन्ना सेंटरों पर न तो अलाव जलवाए गए और न ही किसानों अथवा उनके मवेशियों के लिए रैन बसेरे ही बनवाए गए।

यहां आने वाले किसान पूरी रात खुले आसमान अथवा बैलगाड़ियों के नीचे रात गुजारते मिल जाएंगे। बाक्सआदेश बेअसर लगातार खुल रहे हैं निजी स्कूलबेसिक शिक्षा परिषद ने पिछले बार के अनुभवों को देखते हुए इस साल से अपने शैक्षिक पंचांग में सर्दी की छुट्टियां सूचीबद्ध कर दीं। सरकारी आदेशों के अनुसार अग्रिम आदेशों तक प्रदेश भर में 10 जनवरी तक सरकारी अथवा मान्ताप्राप्त गैर सरकारी स्कूलों को बंद रखना था। मगर खमरिया कस्बे में संचालित प्राइवेट स्कूलों में से करीब आधा दर्जन निजी स्कू ल सरकारी आदेशों को दरकिनार कर लगातार खोले जा रहे हैं।

जहां कक्षा आठ तक के बच्चों भीषण ठंड में स्कूल आने को मजबूर हैं। निजी स्कूल संचालकों की संवेदनहीनता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इन्होंने स्कूल की टाइमिंग में भी कोई बदलाव नहीं किया है। खमरिया में ये यब पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले पिछले सालों तक सर्दियों में डीएम द्वारा घोषित शीतकालीन अवकाशों के दौरान भी स्कूल खोले गए थे। बाक्समिलों, गन्ना क्रय केन्द्रों पर ठिठुरते हैं किसान व मवेशीचीनी मिलों ने सर्दियों से नबिटने के क्या इंतजाम किए हैं।

इसकी पोल मिल के केन यार्ड में कदम रखते ही खुल जाती है। वहां न तो अलाव जलवाए हैं और न ही किसानों और मवेशियों के लिए रैन बसेरे ही बनवाए हैं। मवेशी हों चाहे किसान गन्ना लेकर आने वालों की रात खुले आसमान के नीचे ही कटती है। यहां रात में किसान बैलगाड़ियों अथवा ट्रलियों के नीचे दुबक कर रात काटने को मजबूर रहते हैं। बाक्स प्रशासन ने अभी तक नहीं जलवाए अलाव खमरिया-खीरी। सर्दियों की शुरुआत होते ही प्रशासन ने हर तहसील में अलाव जलवाने के लिए बजट आवंटित कर दिया था।

लोगों के सर्दी से निजात दिलाने के नाम पर भी यहां खेल हो गया। अभी तक सरकारी पैसे से कस्बे में अलाव नहीं जलवाए गए हैं। जबकि सदर चौराहा, बस स्टैंड, सरकारी अस्पताल, मिलगेट, केन यार्ड और अन्य कई सार्वजनिक जगहों पर लोगों को अलाव की जरूरत रहती है। अलबत्ता कस्बे में बस स्टैंड पर टैक्सी यूनियन ने जरूर अपने खर्चे पर अलाव जलवाया है। इसके अलावा पूरे कस्बे में कहीं भी शीत लहरी के दौरान आग देखने के लिए भी नहीं मिलेगी।

जिससे लोग बाग सर्दी से बच सकें।

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